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रक्षा सचिव ने सिंगापुर में ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और नीदरलैंड के अधिकारियों से मुलाकात की

सिंगापुर, 30 मई (भाषा) रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शनिवार को सिंगापुर में ‘शांगरी-ला डायलाग’ से इतर ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और नीदरलैंड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अलग-अलग वार्ता की। भारत ने प्रमुख हिंद-प्रशांत और यूरोपीय साझेदारों के साथ रक्षा कूटनीति को गति दी है।

सिंह की ऑस्ट्रेलियाई रक्षा सचिव मेघन क्विन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद, भारत के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘‘दोनों पक्षों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की, आगामी उच्चस्तरीय बैठकों पर चर्चा की और पारस्परिक हित के क्षेत्रों में रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विमर्श किया।’’

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग पर बढ़ते ध्यान के बीच हाल के वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंधों का रणनीतिक महत्व बढ़ गया है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया है, जहां से वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। भारत के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र उसकी सुरक्षा रणनीति का मूल है, जिसके रणनीतिक हित मलक्का जलडमरूमध्य से लेकर फारस की खाड़ी तक फैले हुए हैं।

सिंह ने यूरोपीय विदेश कार्रवाई सेवा की महासचिव बेलेन मार्टिनेज कार्बोनल और यूरोपीय संघ सैन्य समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एनरिको बरदुवानी से भी मुलाकात की।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘बैठक ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक संवाद को आगे बढ़ाया, जिसमें साझा सुरक्षा हितों और रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर चर्चा हुई।’’

यह मुलाकात समुद्री सुरक्षा और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रम सहित रणनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते सहयोग के बीच हुई।

सिंह ने नीदरलैंड के रक्षा मंत्री दिलन येसिलगोज-जेगेरियस से भी बातचीत की।

भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चर्चा का मुख्य विषय द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाना, सैन्य संबंधों को मजबूत करना और रक्षा औद्योगिक सहयोग के अवसरों की खोज करना था, जो दोनों पक्षों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।

ये सभी बैठकें एशिया के प्रमुख सुरक्षा शिखर सम्मेलन ‘शांगरी-ला डायलाग’ के दौरान हुईं, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र और इससे इतर क्षेत्र के रक्षा मंत्री, सैन्य नेता और सुरक्षा अधिकारी शामिल होते हैं।

भाषा संतोष नेत्रपाल

नेत्रपाल