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पूरी तरह आत्मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है भारत का रक्षा क्षेत्र : राजनाथ सिंह

(तस्वीर के साथ)

लखनऊ, 30 मई (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र पूरी तरह से आत्मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा रक्षा उत्पादन 2014 के 46 हजार करोड़ रुपये के मुकाबले अगले महीने पौने दो लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा।

सिंह ने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र लखनऊ में नौसेना शौर्य वाटिका का लोकार्पण करने के बाद अपने सम्बोधन में रक्षा क्षेत्र में भारत की तीव्र प्रगति और रक्षा निर्यात में हुई बढ़ोत्तरी का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि 2014 के पहले भारत में छोटे-मोटे हथियारों के कलपुर्जों का निर्यात केवल एक हजार करोड़ रुपए का था लेकिन अब भारत का रक्षा क्षेत्र पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी तब से ही इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भारत सही मायनों में सबसे ताकतवर कहलाए ताकि देश की सेनाओं को हथियार के लिए अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़े।

उन्होंने कहा कि 'मेक इन इंडिया' और ‘डिफेंस कॉरिडोर’ समेत कई कदमों से यह सुनिश्चित किया गया कि भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक हथियार भारत में ही निर्मित किये जाएं और अगर संभव हो तो हम उन्हें दूसरे देशों को बेच सके।

सिंह ने कहा, ‘‘जब हमने रक्षा क्षेत्र में निर्यात की ओर ध्यान देने की बात कही थी तो कई लोगों ने हमारी इस योजना को बड़ी शंका की नजर से देखा था, क्योंकि भारत का रक्षा क्षेत्र कभी अपने निर्यात के लिए नहीं जाना जाता था, आयात के लिए जाना जाता था।’’

सिंह ने कहा, ‘‘पिछले 10 वर्षों में हम सभी ने मिलकर जो मेहनत की है उसका परिणाम आज हमें मिल रहा है। 2014 में हमारा घरेलू रक्षा उत्पादन मात्र 46 हजार करोड रुपए था, लेकिन आज वही बढ़कर डेढ़ लाख करोड़ से अधिक हो चुका है । मैं बताना चाहता हूं कि जून समाप्त होते-होते आपको यह जानकारी मिलेगी कि यह डेढ़ लाख करोड़ रुपये नहीं, बल्कि पौने दो लाख करोड रुपए हो गया है।’’

उन्होंने भारत के रक्षा निर्यात का जिक्र करते हुए कहा कि भारत हमेशा रक्षा उपकरणों के आयात के लिये ही जाना जाता था। उन्होंने कहा कि 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार बनने से पहले तक भारत का रक्षा उपकरणों का निर्यात एक हजार करोड़ रुपये से भी कम था लेकिन आज वह बढ़कर 40 हजार करोड़ रुपए हो गया है।

रक्षा मंत्री ने कहा,‘‘इस उपलब्धि में उत्तर प्रदेश और विशेषकर लखनऊ का भी योगदान रहा है। उत्तर प्रदेश की धरती पहले से ही भारत की सेवा में अपनी भागीदारी के लिए जानी जाती है और यहां के जवानों ने हर युद्ध में बढ़-चढ़कर कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा भी की है लेकिन हमने इसे और आगे बढ़ने का संकल्प लिया है और इसी सोच के साथ हमने यहां पर लखनऊ में डीआरडीओ की प्रयोगशालाएं भी शुरू की हैं।’’

उन्होंने कहा कि ‘डिफेंस कॉरिडोर’ के माध्यम से उत्तर प्रदेश भारत के रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बना रहा है और लखनऊ में ब्रह्मोस का भी निर्माण हो रहा है एवं यह राज्य कई तरह से उत्तर प्रदेश के रक्षा उपकरण उत्पादन को मजबूत कर रहा है।

भाषा सलीम

नेत्रपाल राजकुमार

राजकुमार