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ओएसएम प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली के लगभग 20 मामले सामने आये: सूत्र

नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा इस वर्ष पहली बार शुरू की गई ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली के लगभग 20 मामले सामने आए, जबकि लगभग 13,000 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच हाथ से करनी पड़ी। सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

विद्यार्थियों ने पोर्टल पर अपलोड की गई स्कैन प्रतियों को देखने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली के मामलों को उजागर किया, क्योंकि उन्हें पता चला कि उत्तर पुस्तिकाएं उनकी नहीं थीं।

सूत्रों ने कहा, ‘‘वेदांत नामक छात्र का एक मामला था। वेदांत को उत्तर पुस्तिका मिली, और उसे यह देखकर बहुत हैरानी हुई कि यह उसकी उत्तर पुस्तिका नहीं थी। स्कैनिंग में अदला-बदली हो गई थी।’’

इससे पहले, 12वीं कक्षा के छात्र वेदांत का मामला तब सुर्खियों में आया जब उसने आरोप लगाया कि सीबीएसई द्वारा पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत अपलोड की गई भौतिकी की उत्तर पुस्तिका उसकी नहीं थी। संजना नामक छात्रा समेत कई अन्य विद्यार्थियों ने भी सोशल मीडिया पर इसी तरह के दावे किये।

बाद में सीबीएसई ने उनसे संपर्क किया और उन्हें उनकी सही उत्तर पुस्तिकाएं साझा कीं।

बोर्ड ने कहा कि उसने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में विद्यार्थियों द्वारा कथित रूप से बेमेल उत्तर पुस्तिकाओं और अन्य चिंताओं से संबंधित मामलों को ‘‘सर्वोच्च प्राथमिकता’’ पर लिया है।

सूत्रों ने बताया, ‘‘कुछ मामलों में स्कैनिंग में अदला-बदली हुई है। ऐसे मामले लगभग 20 हैं। विद्यार्थियों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं को देखने के बाद इस गड़बड़ी की ओर ध्यान दिलाया।’’

सूत्रों के अनुसार ओएसएम प्रणाली के तहत 98 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं, यानी लगभग 40 करोड़ शीट को स्कैन किया गया।

सूत्रों ने बताया, ‘‘इन 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं में से लगभग 68,000 में स्कैनिंग के दौरान गुणवत्ता संबंधी समस्याएं पाई गईं और इन्हें दोबारा स्कैन किया गया। दोबारा स्कैन करने के बाद भी 13,000 से अधिक उत्तर पुस्तिकाए इतनी स्पष्ट या पढ़ने योग्य नहीं हो सकीं जितनी अपेक्षित थी।’’

अधिकारियों ने ओएसएम की शुरुआत किये जाने का बचाव करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी आधारित मूल्यांकन से पारदर्शिता बढ़ती है और विद्यार्थियों के साथ उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप से साझा करना संभव हो जाता है।

अधिकारियों ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी ही भविष्य है। अगले वर्ष से उत्तर पुस्तिकाएं भी अंकपत्रों के साथ-साथ डिजीलॉकर में उपलब्ध होंगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगले वर्ष से सभी उत्तर पुस्तिकाएं एक साथ डिजीलॉकर में भेजी जाएंगी। प्रौद्योगिकी एक प्रकार की पारदर्शिता प्रदान करती है।’’

सूत्रों ने बताया, ‘‘जब भी आप कोई काम पहली बार करते हैं, तो चुनौतियां तो आती ही हैं।’’

भाषा देवेंद्र वैभव

वैभव