प्रयागराज, 29 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गोकशी के दो आरोपियों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका), 1980 के तहत हिरासत में रखने के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि कथित कृत्य एक मकान की चारदीवारी के भीतर किया गया था ना कि सार्वजनिक स्थल पर।
उच्च न्यायालय ने 26 मई को दिये निर्णय में कहा कि कथित कृत्य किसी तरह की हिंसा या लोक शांति में व्यवधान या सांप्रदायिक सौहार्द में व्यवधान नहीं था जो रासुका के तहत हिरासत के लिए आवश्यक है।
न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार की खंडपीठ ने इस्लाम उर्फ इसाम और समीर द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं स्वीकार करते हुए दोनों लोगों को तत्काल प्रभाव से रिहा करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा, “उपरोक्त दलीलों के मद्देनजर यह अपरिहार्य निष्कर्ष निकलता है कि रासुका के तहत इन याचिकाकर्ता के खिलाफ पारित हिरासत का आदेश कानून की दृष्टि में कहीं नहीं टिकता। इसलिए यह खारिज किए जाने योग्य है।”
शामली के जिला मजिस्ट्रेट ने गो हत्या निषेध कानून की धारा तीन, पांच (ए) और आठ के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धारा तीन(दो) के तहत दोनों को हिरासत में लेने का आदेश जारी किया था।
पुलिस को पिछले साल 23 अप्रैल को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ व्यक्ति गोकशी कर रहे हैं और मकान के भीतर तलाशी के बाद पुलिस ने एक कटा हुआ सिर, पैर, खाल व मांस बरामद किया था।
पशु चिकित्सक द्वारा वैज्ञानिक जांच में बरामद मांस की पहचान गाय के मांस के तौर पर हुई थी।
जिला मजिस्ट्रेट ने सात जुलाई, 2025 को आदेश पारित करते हुए निर्देश दिया कि दोनों आरोपियों को 12 महीने तक हिरासत में रखा जाए।
भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
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