कोलकाता, 29 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार कथित गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन शिक्षक भर्ती घोटाले की सीबीआई जांच पर लगी रोक को हटाने तथा इस संघीय एजेंसी को जांच आगे बढ़ाने की अनुमति के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।
उन्होंने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये सीबीआई जांच के आदेश पर उच्चतम न्यायालय से स्थगन प्राप्त किया था।
अधिकारी ने यहां राज्य सचिवालय में दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्ता की उपस्थिति में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के नेताओं-- बिमल गुरुंग और रोशन गिरि के साथ हुई बैठक के बाद यह घोषणा की।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि जीटीए के तहत 400 से अधिक शिक्षकों की अवैध रूप से भर्ती की गई थी।
उन्होंने कहा, “हमें जीटीए से जुड़े कई घोटालों की शिकायतें मिली हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले में 400 से अधिक शिक्षकों की अवैध भर्ती शामिल है। कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक मामला चल रहा था और सीबीआई जांच का आदेश भी जारी किया गया था। पिछली सरकार ने उच्चतम न्यायालय से इस पर स्थगन आदेश प्राप्त किया था।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, “आज मैंने मुख्य सचिव से इस मामले से हटने और सीबीआई जांच शुरू करने को कहा है ताकि भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके।”
उत्तर बंगाल के चाय क्षेत्र का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा कि कम से कम 25 चाय बागान लंबे समय से बंद पड़े हैं, जिससे हजारों मजदूर प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, “हमारे प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने 2021 के बजट में चाय बागान मजदूरों के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा की थी। राज्य सरकार को इसके लिए एक समिति गठित करनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और चाय बागान मजदूर इसके लाभ से वंचित रह गए।”
अधिकारी ने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन करने पर चाय बागान क्षेत्रों के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का आश्वासन दिया था।
उन्होंने कहा, “मैं इन 300 करोड़ रुपये का उपयोग पहाड़ी क्षेत्रों में चाय बागान के विकास के लिए करना चाहता हूं।”
भाषा राजकुमार वैभव
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