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उप्र: अध्यापक की खुदकुशी के मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

प्रयागराज, 29 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने देवरिया में एक सहायक अध्यापक की खुदकुशी के मामले में जिले की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान, बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी और ‘सुसाइड नोट’ में इसके लिए शालिनी को जिम्मेदार ठहराया था।

इस मामले में मृतक की पत्नी गुड़िया सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

कृष्ण मोहन सिंह की नियुक्ति एक जुलाई, 2016 को देवरिया के गौरी बाजार में कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी।

वर्ष 2023 में सेवा के संबंध में कुछ आरोपों के आधार पर सिंह की नियुक्ति गलत ढंग से रद्द कर दी गई और उनके साथ दो अन्य सहायक अध्यापकों ओंकार सिंह और अपर्णा तिवारी की नियुक्ति भी रद्द कर दी गई।

नियुक्ति रद्द किए जाने के खिलाफ सिंह और दो अन्य अध्यापकों ने उच्च न्यायालय का रुख किया, जहां सिंह के पक्ष में निर्णय आया।

शालिनी ने 24 मार्च, 2023 और एक अप्रैल, 2023 के आदेश के तहत फिर से तीनों की सेवाएं समाप्त कर दीं।

तीनों अध्यापकों ने इन आदेशों के खिलाफ फिर से याचिका दायर की और उच्च न्यायालय ने बेसिक शिक्षा अधिकारी का आदेश रद्द करते हुए उन्हें नए सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया।

मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया कि अधिकारी द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं किया गया और आवेदन लंबित रहने के दौरान बीएसए कार्यालय में कार्यरत लिपिक संजीव सिंह ने तीनों अध्यापकों से 16 लाख रुपये रिश्वत मांगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सिंह ने धमकी दी थी कि रकम नहीं देने पर उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद तीनों की नियुक्ति नहीं की जाएगी।

मृतक की पत्नी ने शिकायत में कहा कि 20 फरवरी, 2026 को शालिनी और सिंह ने कृष्ण मोहन को कार्यालय बुलाया और उनका उत्पीड़न किया तथा झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी।

इस उत्पीड़न से आहत होकर कृष्ण मोहन ने 20 फरवरी, 2026 को आत्महत्या कर ली।

अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद 27 मई को शलिनी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र

जितेंद्र