नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि केंद्र से परामर्श करने के बाद वह अगले साल से पेन और पेपर के बजाय सीबीटी (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) के जरिये नीट-यूजी आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
नीट आयोजित करने वाली एनटीए ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह बयान दिया।
उच्चतम न्यायालय इस मुद्दे पर दाखिल याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था। इन याचिकाओं में से एक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) का पुनर्गठन या प्रतिस्थापन करने और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) आयोजित करने के वास्ते एक मजबूत एवं स्वायत्त प्रणाली बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
एनटीए ने तीन मई को नीट परीक्षा आयोजित की थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच 12 मई को यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी। 21 जून को पुनर्परीक्षा निर्धारित की गई है।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ के समक्ष दायर एक हलफनामे में, एनटीए ने कहा कि विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसीई) ने नीट-यूजी को सीबीटी माध्यम में बदलने की सिफारिश की है।
इसने कहा कि एनटीए की प्रमुख परीक्षाओं में से केवल नीट (यूजी) 2026 ही पेन और पेपर (पीपीटी) माध्यम से आयोजित की गई थी, जो मुख्य रूप से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की योजना के अनुरुप थी।
उसने कहा कि एनटीए की अन्य सभी प्रमुख परीक्षाएं पहले से ही सीबीटी माध्यम से आयोजित की जा रही हैं।
एनटीए के निदेशक (विधिक) द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है, ‘‘एचएलसीई ने विशेष रूप से नीट (यूजी) को पीपीटी से सीबीटी माध्यम में बदलने के साथ-साथ बहु-सत्र और बहु-चरणीय परीक्षण शुरू करने की सिफारिश की है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘यह बदलाव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से अगले परीक्षा सत्र से लागू किया जाएगा, जिससे एनटीए की सभी प्रमुख परीक्षाएं सीबीटी के जरिये कराई जायेंगी।’’
यह हलफनामा उच्चतम न्यायालय द्वारा 25 मई को पारित आदेश के अनुसरण में दायर किया गया था।
एनटीए ने अपने हलफनामे में कहा कि उसने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की शुचिता और बड़ी संख्या में वास्तविक उम्मीदवारों के हितों की रक्षा के लिए सद्भावनापूर्वक, उचित सावधानी के साथ और कानून के अनुसार कार्य किया है।
इसमें कहा गया है कि जून 2024 में, शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एचएलसीई का गठन किया था, ताकि एनटीए में सुधार के लिए सिफारिशें की जा सकें।
हलफनामे में कहा गया है कि एचएलसीई ने अक्टूबर 2024 में केंद्र को अपनी व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी और रिपोर्ट में 101 सिफारिशें शामिल थीं।
इसमें कहा गया है कि एचएलसीई रिपोर्ट में निहित सिफारिशों को समयबद्ध और जवाबदेह तरीके से लागू किया जाए, यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंत्रालय ने नवंबर 2024 में राधाकृष्णन की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति (एचपीएससी) का गठन किया।
एनटीए ने एचपीएससी के कामकाज के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी।
इसमें कहा गया है कि नीट (यूजी) 2026 परीक्षा तीन मई को 5,432 केंद्रों पर आयोजित की गई थी और इसमें 22.05 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे।
हलफनामे में कहा गया है, ‘‘21 जून, 2026 को निर्धारित पुनर्परीक्षा एचपीएससी के निर्देशों और पर्यवेक्षण के अनुरूप, बहुस्तरीय प्रमाणीकरण, निगरानी और अंतर-एजेंसी समन्वय के साथ और भी मजबूत एसओपी ढांचे के तहत आयोजित की जाएगी।’’
इसमें कहा गया है कि तीन मई की परीक्षा को रद्द करना और मामले को जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपना ‘‘स्वयं इस बात का उदाहरण है कि प्रतिवादी और भारत सरकार परीक्षा की निष्पक्षता को कितनी गंभीरता से देखते हैं’’।
इसमें कहा गया है कि यह निर्णय छात्रों के हित में और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली जिस भरोसे पर टिकी है, उसे ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
एनटीए ने कहा, ‘‘जारी जांच में प्रतिवादी द्वारा सीबीआई को सभी आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है।’’
भाषा देवेंद्र वैभव
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