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टीवी विज्ञापनों की समयसीमा सीमित करने वाले ट्राई के विनियम को अदालत ने बरकरार रखा

नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के उस विनियम को शुक्रवार को बरकरार रखा, जिसमें प्रसारण के दौरान विज्ञापनों को प्रतिघंटे 12 मिनट तक सीमित किया गया है। अदालत ने कहा कि संविधान सार्वजनिक संसाधनों के अधिकतम मुनाफा कमाने और असीमित मुद्रीकरण की गारंटी नहीं देता।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की एक पीठ ने कई सामान्य मनोरंजन चैनल, समाचार प्रसारणकर्ताओं और क्षेत्रीय चैनल द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें सेवा की गुणवत्ता के मानक (टेलीविजन चैनल में विज्ञापनों की अवधि) विनियम, 2012 के विनियम 3 तथा अन्य संबंधित प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी।

अदालत ने फैसला सुनाया कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने विज्ञापनों के लिए 'प्रतिघंटे 10+2 मिनट' की समयसीमा निर्धारित करते समय अपने वैधानिक अधिकार क्षेत्र के भीतर काम किया और इस ढांचे ने प्रसारकों के अधिकारों और सार्वजनिक हित के बीच प्रसारण स्पेक्ट्रम के कुशल और निष्पक्ष उपयोग में एक उचित संतुलन स्थापित किया।

अदालत ने कहा कि स्पेक्ट्रम और एयरवेव्स सीमित सार्वजनिक संसाधन हैं, जिन्हें राज्य जनता की ओर से संभालता है। अदालत ने कहा कि ट्राई का यह ढांचा संविधान के अनुच्छेद 39(बी) और 39(सी) के अनुरूप है, क्योंकि यह अत्यधिक व्यावसायिक दोहन को रोकता है और संसाधनों के समान एवं न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित करता है।

अदालत ने कहा कि यह पाबंदी जनहित में है, दर्शकों के अनुभव को संरक्षित करता है और प्रसारकों की सामग्री, मूल्य निर्धारण या व्यावसायिक मॉडल निर्धारित करने की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करता है।

याचिकाकर्ताओं में 9एक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन शामिल थे। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि ट्राई के पास विज्ञापनों को विनियमित करने की शक्ति नहीं है और इसके परिणामस्वरूप उन्हें विज्ञापन राजस्व का नुकसान हुआ है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ट्राई का ढांचा स्पष्ट रूप से मनमाना नहीं था क्योंकि यह परामर्श, उपभोक्ताओं की वास्तविक चिंताओं और तुलनात्मक अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं पर आधारित है।

अदालत ने यह भी कहा कि ट्राई द्वारा अपनाई गई निर्णय प्रक्रिया परामर्श, पारदर्शिता और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की आवश्यकताओं को पूरा करती है।

भाषा अमित माधव

माधव