नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से जनकपुरी इलाके में एक निजी स्कूल के कर्मचारी द्वारा तीन वर्षीय बच्ची के साथ कथित तौर पर बलात्कार किए जाने के मामले में एक शिक्षिका को दी गई जमानत रद्द करने का आग्रह किया।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने पुलिस की उस याचिका पर शिक्षिका को नोटिस जारी किया जिसमें निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसके तहत 20 मई को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामले में शिक्षिका को जमानत दे दी गई थी।
न्यायाधीश ने मुख्य आरोपी ललित कुमार को उसे जमानत देने के आदेश के खिलाफ पुलिस की याचिका पर जवाब देने के वास्ते समय दिया और दोनों मामलों की सुनवाई 17 जून के लिए अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दी।
शिक्षिका को घटना की जानकारी अधिकारियों से छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और 14 मई को निचली अदालत ने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था।
यह घटना एक मई को तब सामने आई जब बच्ची की मां ने जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि मुख्य आरोपी कुमार ने स्कूल के समय के दौरान उसकी बेटी का यौन उत्पीड़न किया।
शिकायत के अनुसार, बच्ची 30 अप्रैल को स्कूल गई थी, जो उसके दाखिले के दूसरा दिन था।
घर लौटने पर बच्ची ने दर्द की शिकायत की। जब उसकी माँ ने उससे पूछताछ की, तो लड़की ने बताया कि उसे स्कूल में एक सुनसान इलाके में ले जाया गया था, जहाँ उस व्यक्ति ने कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया।
बच्ची की मां की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(1) (बलात्कार के लिए सजा) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया।
पुलिस ने बताया कि बच्ची ने आरोपी की पहचान कर ली, जिसके बाद 57 वर्षीय स्कूल के केयरटेकर को एक मई को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उसे अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
हालांकि, अभियोजन पक्ष के कड़े विरोध के बावजूद, द्वारका की एक अदालत ने उसे सात मई को जमानत दे दी।
भाषा नेत्रपाल माधव
माधव