कोलकाता, 29 मई (भाषा) कोलकाता और दक्षिण बंगाल के कई जिलों में शुक्रवार दोपहर बादलों की गर्जना, बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। भीषण गर्मी से परेशान लोगों को इस बारिश से बड़ी राहत मिली।
खराब मौसम का असर कोलकाता हवाई अड्डे पर भी देखने को मिला, जहां जलभराव के कारण हवाई पट्टियां प्रभावित होने से एक घंटे से अधिक समय तक उड़ानों का आगमन और प्रस्थान रोकना पड़ा।
अधिकारियों के अनुसार, सियालदह के दक्षिणी उपनगरीय मार्ग के बोंगांव खंड में पेड़ और बिजली के तार रेलवे ट्रैक पर गिर जाने से रेल सेवाएं बाधित रहीं।
उन्होंने बताया कि तेज आंधी के चलते कोलकाता और आसपास के साल्ट लेक क्षेत्र में कई पेड़ उखड़ गए, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और कुछ स्थानों पर संपत्तियों को नुकसान पहुंचा, कई जगह पेड़ों की शाखाएं सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों पर गिर गईं।
उन्होंने बताया कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, हालांकि साल्ट लेक में बिजली गिरने से एक दोपहिया वाहन चालक घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कोलकाता नगर निगम और राज्य आपदा प्रबंधन दल के कर्मचारियों को वृक्ष काटने वाली मशीनों और बुलडोजरों की सहायता से सड़कों से गिरे पेड़ और मलबा हटाने के कार्य में लगाया गया।
पड़ोसी हावड़ा और हुगली जिलों से भी इसी तरह के खराब मौसम की खबरें मिली हैं। कुछ इलाकों में आंधी इतनी तेज थी कि धूल के गुबार के कारण दृश्यता बेहद कम हो गई और वाहन चालकों को दिन में ही हेडलाइट जलानी पड़ी।
तेज हवाओं के कारण कई होर्डिंग और बैनर भी क्षतिग्रस्त हो गए। दक्षिण कोलकाता के शहीद खुदीराम मेट्रो स्टेशन की छत पर लगे कुछ शेड उड़ गए, जिससे प्लेटफॉर्म पर पानी भर गया और ब्लू लाइन की सेवाएं प्रभावित हुईं।
अलीपुर स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग के क्षेत्रीय केंद्र ने बताया कि अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों और बंगाल की खाड़ी से आ रही भारी नमी के कारण अगले दो दिनों तक दक्षिण बंगाल में गरज-चमक के साथ बारिश जारी रहने की संभावना है।
मौसम विभाग ने पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तटीय इलाकों के मछुआरों को भी समुद्र में न जाने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, शुक्रवार तक इस क्षेत्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि आंधी-तूफान के दौरान घरों के भीतर सुरक्षित रहें और पेड़ों या जर्जर इमारतों के नीचे शरण लेने से बचें।
भाषा तान्या रंजन
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