इंदौर, 29 मई (भाषा) कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई ने शुक्रवार को दावा किया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में पेयजल के 240 नमूनों में से करीब 98 प्रतिशत नमूने जांच में दूषित पाए गए हैं और इनमें अतिसार (डायरिया) जैसी बीमारियां फैलाने वाले रोगाणु मिले हैं।
स्थानीय प्रशासन ने प्रमुख विपक्षी दल के इस दावे को ‘भ्रामक’ बताकर खारिज किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने संवाददाताओं को बताया कि शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दिसंबर 2025 में सामने आई पेयजल त्रासदी के बाद पार्टी ने 29 वॉर्ड से पेयजल के 240 नमूने जमा किए थे।
उन्होंने कहा कि नोएडा की एक प्रयोगशाला में कराई गई जांच में इनमें से करीब 98 प्रतिशत नमूनों का पानी दूषित पाया गया है।
पटवारी ने कहा कि जांच के दौरान पानी में ई. कोलाई और कोलीफॉर्म जैसे बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली, वहीं कैल्शियम कार्बोनेट, क्लोराइड और सल्फेट समूह के रासायनिक पदार्थ निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक मात्रा में पाए गए।
जानकारों के मुताबिक जल के नमूने में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिलने का मतलब होता है कि पानी दूषित हो सकता है, जबकि ई. कोलाई मिलने को अधिक गंभीर माना जाता है क्योंकि यह आमतौर पर मानव या पशु मल से हुए प्रदूषण का संकेत है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि दूषित पानी पीने से लोगों को अतिसार, हैजा, टाइफाइड, पीलिया और पेचिश जैसी बीमारियां हो सकती हैं और गंभीर मामलों में मरीज की मौत भी हो सकती है।
उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘इंदौर देश का सबसे स्वच्छ नहीं, बल्कि सबसे ज्यादा संक्रमित शहर बन गया है।’’
पटवारी ने पूरे शहर का स्वतंत्र जल ऑडिट कराए जाने, हर वॉर्ड के पानी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दूषित पानी वाले इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की।
उधर, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर के पेयजल की गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहा,'पेयजल के बारे में कांग्रेस की जारी जांच रिपोर्ट भ्रामक है। इसे शहर की छवि बिगाड़ने की साजिश के तहत तैयार किया गया है।'
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने फरवरी के दौरान शहर के चुनिंदा इलाकों से पेयजल के नमूने लिए थे और इनकी जांच रिपोर्ट तीन महीने तक जान-बूझकर दबाकर रखी गई।
स्थानीय लोगों और कांग्रेस ने भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त के प्रकोप में 36 लोगों की मौत का दावा किया है।
हालांकि, इस मामले पर चर्चा के दौरान विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई है और हर मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों की मौत के मामले की जांच कर रहा है।
उच्च न्यायालय ने आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करने के लिए 14 जून तक की मोहलत दी है।
भाषा
हर्ष रवि कांत