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अवैध गुर्दा प्रतिरोपण गिरोह का ‘मास्टरमाइंड’ गिरफ्तार

कानपुर (उप्र), 13 अप्रैल (भाषा) कानपुर पुलिस ने सोमवार को एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए अवैध तरीके से गुर्दा प्रतिरोपण करने वाले गिरोह के इनामी ‘मास्टरमाइंड’ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने यह जानकारी दी।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि गिरोह के मास्टरमाइंड और 25 हजार रुपये को इनामी रोहित को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि मात्र 12वीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण करने वाला रोहित खुद को डॉक्टर बताता था।

लाल ने बताया कि रोहित की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में गिरफ्तार किये गये लोगों की संख्या बढ़कर 10 हो गयी है।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि ‘आपरेशन थियेटर’ की कई तस्वीरों में डॉक्टरों के साथ चिकित्सक का रूप धरे दिख रहे रोहित ने शुरुआती पूछताछ में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन बाद में उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया।

उन्होंने बताया कि रोहित ने स्वीकार किया कि उसे हर गुर्दा प्रतिरोपण पर 18 लाख रुपये मिलते थे जिन्हें वह गिरोह के सदस्यों में वितरित करने के बाद अपना हिस्सा रख लेता था।

लाल ने बताया कि मामले का भंडाफोड होने के दो हफ्ते बाद गिरफ्तार किये गये रोहित ने पकड़े जाने से बचने के लिये गोवा, काठमांडू, मनाली और शिमला में छुपने की कोशिश की थी।

इस गिरोह का भंडाफोड़ 30 मार्च को पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों की संयुक्त छापेमारी के बाद हुआ था।

अधिकारियों के मुताबिक यह छापेमारी कानपुर नगर के रावतपुर और कल्याणपुर में कई जगहों पर की गई थी, जिनमें आहूजा, मेड-लाइफ और प्रिया अस्पताल भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई एक अंगदाता की शिकायत के बाद की गई थी।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक बिहार के बेगूसराय के रहने वाले अंग दाता एमबीए छात्र आयुष ने आरोप लगाया था कि प्रतिरोपण के लिये अपना गुर्दा देने के बदले उसे 10 लाख रुपये देने का वादा किया गया था लेकिन उसे सिर्फ साढ़े तीन लाख रुपये दिये गये।

सूत्रों के अनुसार इससे पहले, इस मामले में पांच चिकित्सकों, अस्पताल के मालिकों डॉक्टर प्रीति आहूजा और उसके पति डॉक्टर सुरजीत सिंह आहूजा, आपरेशन थियेटर टेक्नीशियन और एक एम्बुलेंस चालक शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि शिवम अग्रवाल डॉक्टरों, अंगदाता और अंग लेने वालों के बीच एक अहम कड़ी का काम करता था।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सर्जरी के लिए जरूरी उपकरण जुटाने और सर्जरी में मदद करने में इन टेक्नीशियन ने अहम भूमिका निभाई थी।

सूत्रों के मुताबिक अब इस मामले की जांच का दायरा और बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस को शक है कि यह एक ऐसा नेटवर्क है जो कई राज्यों और शायद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम कर रहा है।

पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) एस एम कासिम आब्दी ने बताया कि जांच में कुछ नए सुराग मिले हैं तथा आगे भी कई और खुलासे होने की उम्मीद है।

पुलिस ने बताया कि पुलिस की टीम अफजल और नरेंद्र समेत बाकी बचे आरोपियों को पकड़ने और इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं।

भाषा सं. सलीम राजकुमार

राजकुमार