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पाकिस्तान: पश्चिम एशिया संकट के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़े असर से निपटने को परिषद का गठन

(सज्जाद हुसैन)

इस्लामाबाद, नौ अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़े प्रभावों से निपटने के लिए एक विशेष परिषद का गठन किया है।

राष्ट्रीय समन्वय एवं प्रबंधन परिषद (एनसीएमसी) का गठन अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम से कुछ घंटे पहले किया गया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की थी कि उन्होंने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्ध-विराम पर सहमति जताई है।

एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, एनसीएमसी की कार्यकारी समिति की सह-अध्यक्षता आर्थिक मामलों के मंत्री अहद खान चीमा और लेफ्टिनेंट जनरल जफर इकबाल कर रहे हैं।

इस परिषाद में सभी संघीय विभागों, प्रांतीय सरकारों और विशेष क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व शामिल है।

परिषद को किसी भी अप्रिय स्थिति में आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन का दायित्व सौंपा गया है जिसमें संभावित आंतरिक विस्थापन और शरणार्थियों के मुद्दे शामिल हैं।

यह परिषद वित्तीय, आर्थिक और व्यापार संबंधी नीतिगत उपायों के प्रबंधन और क्रियान्वयन के लिए भी जिम्मेदार होगी।

‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की खबर अनुसार, बुधवार को एनसीएमसी की कार्यकारी समिति की पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया कि युद्ध का खतरा अब भी बने रहने के कारण परिषद अपना काम जारी रखेगी, क्योंकि भले ही युद्ध-विराम स्थायी शांति समझौते में बदल जाए लेकिन अर्थव्यवस्था को सामान्य होने में कई सप्ताह लग सकते हैं।

परिषद ने घरेलू ऊर्जा जरूरतों का आकलन करने के बाद अधिशेष ‘फर्नेस ऑयल’ (भारी ईंधन तेल) के निर्यात की अनुमति दी। कम से कम दो रिफाइनरियों ने सीमित भंडारण क्षमता का मुद्दा उठाया था, जिसके कारण अतिरिक्त मात्रा का निर्यात जरूरी हो गया।

वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने ईंधन आपूर्ति की निगरानी और सुरक्षा संबंधी समिति की अध्यक्षता की और देशभर में किसी प्रकार की कमी न होने देना सुनिश्चित किया।

एक अन्य समिति युद्ध के कारण पाकिस्तान के निर्यात पर पड़ने वाले संभावित असर को कम करने के उपायों पर काम कर रही थी।

अधिकारियों के अनुसार, अब इन सभी समितियों को भंग किया जा रहा है और भविष्य के सभी फैसले राष्ट्रीय समन्वय एवं प्रबंधन परिषद के मंच पर लिए जाएंगे।

भाषा खारी वैभव

वैभव