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उत्तराखंड में यूसीसी के तहत मुकदमा दर्ज न होने से छिड़ा विवाद

हरिद्वार, आठ अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड में हरिद्वार जिले के बुग्गावाला क्षेत्र में दहेज को लेकर तीन तलाक दिए जाने के एक मामले में पुलिस ने महिला के आरोपी पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है लेकिन इसे प्रदेश में पिछले साल लागू की गयी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून की धाराओं के तहत दर्ज न किए जाने को लेकर एक विवाद पैदा हो गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में उत्तराखंड पुलिस फिलहाल यूसीसी कानून लागू करने में असमर्थ दिख रही है और इसका कारण अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) नामक सॉफ्टवेयर अपडेट में देरी बताया जा रहा है।

कानून के जानकारों का कहना है कि यह मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है जिसे यूसीसी की धारा 32 के तहत दर्ज किया जाना चाहिए ।

बुग्गावाला क्षेत्र के बंदरजूड गांव की शाहीन ने थाने में अपने पति और उसके परिजनों के खिलाफ दहेज के लिए उत्पीड़न करने, तीन तलाक देने तथा दोबारा शादी हेतु उस पर हलाला के लिए दबाव डालने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।

अपनी शिकायत में शाहीन ने कहा कि ढाई साल पहले उसकी शादी दानिश के साथ हुई थी और कुछ दिनों बाद से उसे दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया जाने लगा ।

शिकायतकर्ता के अनुसार जब पति और ससुराल वालों के अत्याचारों की हद पार हो गयी तो उसने अपनी व्यथा अपने मायके वालों को बतायी तथा जब मायकेवालों ने उसके पति से बात की तो उसने मामला सुलझाने की बजाए शाहीन को तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया ।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बाद समझौता हुआ तो दोबारा विवाह करने के लिए उसके सामने हलाला की शर्त रख दी गयी जिसके बाद उसने पुलिस में तहरीर दी ।

हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक, देहात, शेखर चंद सुयाल ने बताया कि शाहीन से चार अप्रैल को मिली शिकायत के बाद पुलिस ने दहेज उत्पीड़न अधिनियम की धारा 3/4, भारतीय न्याय संहिता की धारा 115/2, और 85 तथा मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा तीन और चार के तहत मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है ।

मुकदमा यूसीसी के तहत दर्ज नहीं किए जाने के बारे में पूछे जाने पर सुयाल ने कहा कि कभी-कभी सीसीटीएनएस पोर्टल में दिक्कत आने की वजह से यूसीसी में मामला दर्ज नहीं हो पाता है। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी मामले की विवेचना कर रहे हैं और इस दौरान अगर मामला यूसीसी के अंतर्गत आएगा तो उसमें यूसीसी की धाराएं बढ़ा दी जाएगी।

पिछले साल जनवरी में उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुआ था। एक वर्ष से अधिक की अवधि बीत जाने के बावजूद यूसीसी कानून के तहत इस गंभीर मामले को दर्ज नहीं किए जाने को कानून के जानकारों ने निराशाजनक बताया ।

वकील वासु गर्ग ने 'पीटीआई भाषा' को बताया कि यूसीसी के तहत तीन तलाक, हलाला जैसी प्रथाओं को समाप्त करते हुए बिना किसी शर्त के पुनर्विवाह की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि यूसीसी की धारा 32(iii) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को पुनर्विवाह से पहले ऐसी किसी शर्त (जैसे हलाला) का पालन करने के लिए मजबूर करता है, तो उसे इसके तहत आपराधिक दंड मिल सकता है।

उन्होंने बताया कि दंड का स्वरूप इस धारा के तहत उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर जुर्माना या कारावास या दोनों हो सकता है ।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यूसीसी को अपनी उपलब्धि की तरह पेश करती रही है जबकि जमीनी हकीकत बहुत निराशाजनक है ।

भाषा सं दीप्ति राजकुमार

राजकुमार