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रोटोमैक घोटाले से जुड़े एक मामले में में व्यवसायी राजेश बोथरा को जमानत

लखनऊ, आठ अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने रोटोमैक घोटाले से जुड़े एक मामले में व्यवसायी राजेश बोथरा को यह कहते हुए जमानत दे दी कि मुकदमा लंबा चलने की संभावना है।

बोथरा की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने मंगलवार को यह आदेश पारित किया।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज मामले के अनुसार, रोटोमैक एक्ज़िम प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों ने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों, झूठे बिलों और मनगढ़ंत लेनदेन के माध्यम से ऋण सुविधाएं प्राप्त करके एक बैंक को धोखा दिया और बाद में भुगतान में चूक की। मामले में 2020 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने दलील दी कि बोथरा को झूठा फंसाया गया है और उन्होंने पूरे समय जांच में सहयोग किया था, जिसमें कोविड-19 महामारी भी शामिल थी।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके मुवक्किल अन्य संबंधित मामलों में जमानत पर है और उसने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है।

याचिका का विरोध करते हुए, सीबीआई के वकील अनुराग कुमार सिंह ने दलील दी कि बोथरा ने कथित धोखाधड़ी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बैंक को गुमराह करने के लिए अपनी कंपनियों के माध्यम से लेनदेन किया।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, अदालत ने कहा कि जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया था और जमानत के दुरुपयोग को दिखाने के लिए कोई सामग्री नहीं है। इन कारकों और मुकदमे में देरी की संभावना को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने बोथरा को जमानत दे दी।

भाषा सं जफर राजकुमार

राजकुमार