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खरगे की टिप्पणी के विरोध में गुजराती समूहों ने कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) गुजराती समुदाय के सदस्यों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से हाल में केरल में चुनाव प्रचार के दौरान की गई टिप्पणी के विरोध में बुधवार को प्रदर्शन किया।

केरल के इडुक्की जिले में रविवार को एक रैली के दौरान खरगे ने कहा था कि राज्य के लोग ‘‘शिक्षित और समझदार’’ हैं और उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता है, जबकि गुजरात और कुछ अन्य स्थानों के लोग ‘‘अशिक्षित’’ हैं। उनकी इस टिप्पणी के बाद विवाद शुरू हो गया।

प्रदर्शनकारियों ने ‘‘अपमान की राजनीति बंद करो’’ और ‘‘गुजरात जाग चुका है’’ जैसे नारे लगाए और समुदाय के खिलाफ कथित ‘‘अपमानजनक टिप्पणियों’’ पर रोष व्यक्त किया।

भाजपा के नेताओं और गुजराती संगठनों के सदस्यों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया और कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की।

गुजरात के वंसदा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक धवल पटेल ने आरोप लगाया कि ये टिप्पणियां विपक्षी नेताओं द्वारा ‘‘गुजराती लोगों का अपमान करने’’ के एक पैटर्न को दर्शाती हैं।

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य के पूर्व के बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि ऐसी टिप्पणियों ने देश भर में समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

आणंद से सांसद मितेश पटेल ने कहा कि सामुदायिक समूहों की अपील के बाद गुजराती लोग दिल्ली में एकत्रित हुए हैं।

महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं के योगदान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात ने देश के इतिहास और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि खरगे की टिप्पणियों के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक खरगे और अन्य कांग्रेस नेता माफी नहीं मांग लेते।

इस प्रदर्शन पर कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस बीच, दक्षिण दिल्ली के पूर्व महापौर नरेंद्र कुमार चावला ने छह अप्रैल को असम में एक चुनावी रैली के दौरान कथित तौर पर 'भड़काऊ' टिप्पणी करने के लिए खरगे के खिलाफ निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि ये बयान व्यापक रूप से प्रसारित किए गए और इससे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हुआ।

चावला ने निर्वाचन आयोग से उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया, जिसमें खरगे को चुनाव प्रचार से रोकना और कानूनी कार्यवाही शुरू करना शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन टिप्पणियों से सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है।

भाषा आशीष पारुल

पारुल