नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक प्रतिनिधिमंडल और भारत निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के बीच पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर बुधवार को हुई बैठक तनावपूर्ण माहौल में समाप्त हुई।
टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उनसे “यहां से चले जाइए” कहा, जबकि आयोग ने टीएमसी नेताओं पर “चिल्लाने” का आरोप लगाया।
राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन, उप नेता सागरिका घोष, सांसद साकेत गोखले और मेनका गुरुस्वामी वाले एक प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल चुनाव से कुछ दिन पहले निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की।
महज सात मिनट चली बैठक के बाद निर्वाचन आयोग ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से सीधी बात की कि ‘‘इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव निश्चित रूप से “भयमुक्त, हिंसामुक्त, धमकीमुक्त और प्रलोभनमुक्त” होंगे।
पलटवार करते हुए टीएमसी ने कहा कि चुनाव ‘‘दिल्ली के नियंत्रण, राजनीतिक पूर्वाग्रह’’ से मुक्त होने चाहिए। उसने आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया।
आयोग के सूत्रों ने ओ’ब्रायन पर निर्वाचन आयुक्तों पर चिल्लाने का आरोप लगाया। सूत्रों के अनुसार उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से नहीं बोलने को कहा।
सूत्रों के अनुसार ‘‘सीईसी ने डेरेक ओ’ब्रायन से आयोग के कक्ष में गरिमा बनाकर रखने का आग्रह किया। चिल्लाना और अभद्र व्यवहार उचित नहीं हैं।’’
सूत्रों ने दावा किया कि अपने ज्ञापन सौंपने के बाद तृणमूल नेताओं ने सीईसी से कहा कि वह केवल बयान नहीं चाहते, बल्कि जमीनी कार्रवाई चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सीईसी ने ओ’ब्रायन पर जोर से बोलने का आरोप लगाया और उनसे कहा ‘‘यहां से चले जाइए’’।
आयोग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उसने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से ‘सीधी बात’ की।
निर्वाचन आयोग द्वारा किसी बयान में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना और आधिकारिक प्रतिक्रिया में किसी दल का नाम लेना असामान्य है।
बैठक के बाद ओ'ब्रायन ने मीडिया से कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नौ पत्र मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सौंपे जिन पर ध्यान नहीं दिया गया।
तृणमूल नेताओं ने निर्वाचन आयोग को उन कुछ मामलों से भी अवगत कराया जिनमें कुछ निर्वाचन अधिकारियों के भाजपा से तार जुड़े होने का आरोप लगाया गया है और उनके स्थानांतरण की मांग की गई है।
ओ’ब्रायन ने कहा, ‘‘हमने उन्हें ऐसे छह उदाहरण दिए जिनमें अधिकारी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उनके भाजपा के साथ संबंध हैं।’’
इसमें नंदीग्राम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा एक स्थानीय भाजपा नेता के साथ होने का एक उदाहरण दिया गया। तृणमूल कांग्रेस सांसद ने कहा कि इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा गया है।
ओ’ब्रायन ने कहा, ‘‘हमने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) से पूछा कि जब बंगाल में ऐसे दागी अधिकारियों को नियुक्त किया गया हो तो वह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कैसे करा सकते हैं। इस पर उनका जवाब था ‘यहां से चले जाइए।’’
तृणमूल नेता ने कहा, ‘‘हमने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से कहा कि हम उनकी बात नहीं सुनेंगे क्योंकि वह अपने साथियों को बोलने नहीं देते। हमने इस तरह की आठ से नौ बैठकें की हैं, जिसमें सीईसी के अलावा कोई नहीं बोलता।’’
ओ’ब्रायन ने कहा कि बैठक के अंत में तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने ज्ञानेश कुमार को बधाई दी कि वह पहले ऐसे मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं जिन्हें पद से हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस दिए गए।
बैठक में मौजूद एक सूत्र के मुताबिक, जैसे ही तृणमूल का प्रतिनिधिमंडल बैठक में पहुंचा, सीईसी ने उनके अधिकृत प्रतिनिधि के उपस्थित नहीं होने की ओर इशारा किया, जिस पर ओ'ब्रायन ने पूछा कि क्या वे ‘‘अनधिकृत’’ हैं और क्या उन्हें चले जाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने भी ‘एक्स’ पर अपने बयान में बैठक के बारे में आयोग के दावों को खारिज कर दिया।
सागरिका घोष ने आयोग के दावे को ‘सरासर झूठ’ बताया और कहा, ‘‘चार सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल से यह सब कुछ नहीं कहा गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त ‘वेनिश’ कुमार ने हमसे दो लाइन कहीं। पहली लाइन थी कि आपके अधिकृत प्रतिनिधि कहां हैं। और दूसरी बात तो सबसे अधिक शर्मनाक थी कि ‘‘चले जाइए’’।’’
साकेत गोखले ने अपने पोस्ट में आयोग पर एक राजनीतिक दल को चुनने का आरोप लगाया।
आयोग के एक पोस्ट को टैग करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर लिखा, ‘‘निर्वाचन आयोग से सीधी बात। क्या किसी तटस्थ संवैधानिक निकाय से इस तरह के व्यवहार की अपेक्षा की जाती है?’’
भाषा वैभव अविनाश
अविनाश