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यमुना की सफाई और वायु प्रदूषण से निपटना सरकार की ‘समझौता न करने वाली प्राथमिकता’: उपराज्यपाल

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने यमुना की सफाई और वायु प्रदूषण से निपटने को ‘समझौता न करने वाली प्राथमिकता’ बताते हुए बुधवार को कहा कि सरकार पल्ला से कालिंदी कुंज तक के नदी के समूचे बाढ़ क्षेत्र के समयबद्ध विकास की दिशा में काम कर रही है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ नदी के वासुदेव घाट और यमुना बाजार घाट का निरीक्षण करने के बाद उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि वासुदेव घाट, असिता, बनसेरा और यमुना जैव विविधता पार्क जैसे विकसित घाट अब पर्यावरण-अनुकूल, सतत और हरित सार्वजनिक स्थलों के रूप में उभर चुके हैं।

संधू और गुप्ता ने सरकार की ग्रीष्म और मानसून संबंधी तैयारियों का जायजा लिया।

इस दौरे के दौरान, संधू ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को पल्ला से कालिंदी कुंज तक फैले बाढ़ क्षेत्र के संपूर्ण क्षेत्र के पुनरुद्धार का कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर करने का निर्देश दिया। राष्ट्रीय राजधानी में नदी का यह संपूर्ण क्षेत्र लगभग 55 किलोमीटर लंबा है।

उन्होंने कहा कि ये पुनर्विकसित घाट दिल्ली के लोगों को नदी के करीब ला रहे हैं और यमुना के प्रति अपनेपन की भावना को बढ़ावा दे रहे हैं।

संधू ने कहा, 'भविष्य में सरकार के लिए यह आवश्यक है कि वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर वैश्विक स्तर पर सफल सर्वोत्तम प्रथाओं और नवीन समाधानों को इन महत्वपूर्ण पहल में शामिल करे।'

इस निरीक्षण को पिछले महीने हुए ‘औचक संवाद’ का परिणाम बताते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि बातचीत में दिल्लीवासियों ने यमुना प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मानसून में बाढ़ और गर्मियों में जल संकट जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।

उपराज्यपाल ने यमुना और वायु प्रदूषण के समाधान को ‘समझौता न करने वाली प्राथमिकता’ बताते हुए इस दिशा में मिशन मोड पर काम करने का आदेश दिया।

उन्होंने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), दिल्ली प्रदूषण एवं नियंत्रण समिति और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) सहित सभी संबंधित विभागों को सामूहिक रूप से और निर्बाध समन्वय के साथ काम करने का निर्देश भी दिया।

इस दौरे के दौरान, दोनों ने कश्मीरी गेट के पास निचले इलाकों में जलभराव को कम करने के तरीकों और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों, जैसे कि सुरक्षा दीवार के निर्माण पर भी चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने कहा, “दिल्ली सरकार पहले दिन से ही मां यमुना की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का संकल्प एक स्वच्छ, सुंदर और हरित दिल्ली का निर्माण करना है, जिसमें यमुना नदी का पुनरुद्धार एक प्रमुख प्राथमिकता है।”

गुप्ता ने वर्ष 2026-27 के बजट का उल्लेख करते हुए बताया कि दिल्ली सरकार ने 22,236 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरणीय योजनाओं, विशेषकर यमुना सफाई से संबंधित पहल के लिए निर्धारित किए हैं। यह कुल बजट का लगभग 21.44 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी की जल वहन क्षमता बढ़ाने के लिए बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, तीन-स्तरीय एजेंडा के अंतर्गत नदी से गाद निकालने, जल प्रवाह को सुचारु बनाने तथा जलभराव वाले प्रमुख स्थलों का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यमुना का पुनरुद्धार एक दीर्घकालिक एवं सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर प्रयास, जनसहभागिता तथा प्रभावी प्रबंधन आवश्यक है, ताकि भविष्य में जलभराव जैसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और राजधानी को एक स्वच्छ, सुदृढ़ एवं जीवंत नदी तंत्र प्रदान किया जा सके।

भाषा नोमान नोमान वैभव

वैभव