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उच्च न्यायालय ने शारदा घोटाले के आरोपी सुदीप्त सेन को जमानत दी, 13 साल बाद रिहाई का रास्ता साफ

कोलकाता, आठ अप्रैल (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को करोड़ों रूपये के शारदा पोंजी घोटाले के आरोपी सुदीप्त सेन को उनके खिलाफ दर्ज लगभग 300 आपराधिक मामलों में से अंतिम दो मामलों में जमानत दे दी, जिससे 13 साल बाद उनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात थाने से संबंधित दो मामलों में सेन को जमानत दे दी।

सेन को उनके खिलाफ दर्ज अन्य सभी मामलों में पहले ही जमानत मिल गई है जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज चार आपराधिक मामले शामिल हैं।

अदालत ने निर्देश दिया कि सेन को 5,000 रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत पेश करनी होगी। इनमें से एक जमानती स्थानीय व्यक्ति होना चाहिए।

सेन के नेतृत्व वाले शारदा समूह पर पोंजी योजनाओं के माध्यम से लाखों लोगों को ठगने का आरोप है। करोड़ों रुपये के गबन का खुलासा होने के बाद उन्हें अप्रैल 2013 में जम्मू कश्मीर से गिरफ्तार किया गया था।

न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज और उदय कुमार की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि वित्तीय घोटाले के व्यापक स्तर और जनहित की रक्षा को देखते हुए यदि सेन का पासपोर्ट पहले से किसी अन्य एजेंसी के पास जमा नहीं है तो उसे अधीनस्त अदालत को सौंप देना चाहिए।

सेन को उच्च न्यायालय की पूर्व लिखित अनुमति के बिना पश्चिम बंगाल की क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर जाने पर रोक लगाते हुए खंडपीठ ने वित्तीय घोटाले के आरोपी को बारासात थाने के प्रभारी अधिकारी को अपना आवासीय पता प्रदान करने और पुलिस व निचली अदालत, दोनों को पूर्व सूचना दिए बिना अपने रहने का स्थान न बदलने का निर्देश दिया।

अदालत ने निर्देश दिया, 'याचिकाकर्ता को किसी भी वित्तीय संस्था को बढ़ावा देने, प्रबंधित करने या उसके एजेंट या सलाहकार के रूप में कार्य करने से कड़े रूप से प्रतिबंधित किया जाता है।'

सेन को यह भी निर्देश दिया गया कि वह मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति (विशेष रूप से शिकायतकर्ताओं और अभियोजन पक्ष के गवाहों) से संपर्क न करें, उन्हें प्रभावित न करें या डराएं-धमकाएं नहीं। उन्हें सुनवाई की प्रत्येक तिथि पर वर्चुअल माध्यम से या प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होने का भी निर्देश दिया गया।

सेन के साथ-साथ उनकी करीबी सहयोगी देबजानी मुखर्जी को भी 13 साल पहले जम्मू कश्मीर के सोनमर्ग से गिरफ्तार किया गया था। उन्हें पहले ही उनके खिलाफ दर्ज मामलों में जमानत मिल चुकी है।

भाषा

शुभम माधव

माधव