नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारतीय एयरलाइन कंपनियों की 10,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आव ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
संयुक्त सचिव आव ने बताया कि पहले भारतीय एयरलाइन कंपनियां पश्चिम एशिया के लिए रोजाना 300-350 उड़ानें संचालित करती थीं, जो अब घटकर केवल 80-90 रह गई हैं।
संघर्ष के कारण इजराइल, जॉर्डन, लेबनान, कुवैत, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में हवाई क्षेत्र बंद या सीमित कर दिया गया है, जिससे वैश्विक विमानन नेटवर्क और संपर्क पर अभूतपूर्व असर पड़ा है।
यूरोप और उत्तर अमेरिका जाने वाली उड़ानों को अब लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे यात्रा समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने पायलट के लिए कार्य समय में अस्थायी छूट दी है, ताकि लंबी दूरी की उड़ानों का संचालन सुचारू रूप से हो सके।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष से वैश्विक विमानन नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय संपर्क व्यवस्था में अभूतपूर्व व्यवधान पैदा हुआ है।
उन्होंने कहा कि भारतीय एयरलाइन कंपनियों की यूरोप और उत्तर अमेरिका जाने वाली उड़ानों को अब लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे यात्रा समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं।
स्थिति से निपटने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय ने हाल ही में लंबी दूरी की उड़ानें संचालित करने वाले पायलट के लिए उड़ान ड्यूटी समय सीमा में अस्थायी छूट दी है, ताकि संचालन में आ रही बाधाओं और पायलट की कमी के संकट से निपटा जा सके।
इस छूट के तहत उड़ान और ड्यूटी की अवधि बढ़ा दी गई है (जैसे उड़ान समय लगभग 11.5 घंटे तक), जिससे एयरलाइन कंपनियां हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण लंबा मार्ग अपनाने वाली उड़ानों का बेहतर संचालन कर सकें।
इस कदम का उद्देश्य उड़ानों का संचालन सुचारू बनाए रखना और समय-सारिणी की विश्वसनीयता बनाए रखना है, खासकर उन अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर जो मार्ग परिवर्तन से प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा, 'इस फैसले की फिर से समीक्षा की जाएगी। अभी हमारे पास समय है। स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले दिनों में हालात को देखते हुए इस व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर उसी समय उचित निर्णय लिया जाएगा।'
इस संघर्ष के कारण क्षेत्र के सामने आने वाली परिचालन संबंधी चुनौतियों के बारे में बात करते हुए अधिकारी ने बताया कि विमान ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, भारत में कीमतों को नियंत्रित रखते हुए इसका केवल आंशिक असर ही घरेलू एयरलाइन कंपनियों पर डाला गया है।
उन्होंने कहा कि एटीएफ की कीमतों पर सरकारी हस्तक्षेप से घरेलू हवाई किराये स्थिर रखने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। नागर विमानन मंत्रालय इस कठिन समय में उद्योग को सहारा देने के लिए विभिन्न उपायों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने के लिए एमिरेट्स, कुवैत एयरवेज और जज़ीरा एयरवेज जैसी विदेशी एयरलाइन कंपनियों को यात्री विमानों से माल ढुलाई की विशेष अनुमति दी गई है, जिससे जरूरी सामान की आपूर्ति जारी रह सके।
अधिकारी ने कहा कि सरकार यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा, माल ढुलाई की निरंतरता और पूरे क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
भाषा योगेश अजय
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