प्रयागराज, तीन अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक प्राथमिकी में एक केंद्रीय मंत्री के नाम से पहले माननीय शब्द का उल्लेख नहीं करने पर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) से जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने हर्षित शर्मा और दो अन्य लोगों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने मथुरा में अपने खिलाफ पंजीकृत प्राथमिकी रद्द करने की मांग की थी।
अदालत ने 31 मार्च को पारित आदेश में कहा कि भले ही शिकायतकर्ता द्वारा अनुचित ढंग से माननीय मंत्री का उल्लेख किया गया था, प्राथमिकी लिखते समय माननीय शब्द का इस्तेमाल करके प्रोटोकॉल का पालन करना पुलिस की जिम्मेदारी थी। इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि छह अप्रैल तय करते हुए अदालत ने कहा, “अपर मुख्य सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश अपने हलफनामा में यह उल्लेख करेंगे कि प्राथमिकी में माननीय केंद्रीय मंत्री के नाम के पूर्व माननीय शब्द क्यों नहीं लिखा गया और एक जगह तो उनके नाम के पूर्व श्री तक नहीं लगाया गया।”
पीठ ने कहा, “लिखित रिपोर्ट तक में माननीय मंत्री का उल्लेख शिकायतकर्ता द्वारा अनुचित ढंग से किया गया, जबकि प्राथमिकी लिखते समय यह पुलिस का दायित्व था कि वह माननीय शब्द लिखकर प्रोटोकॉल का पालन करे।”
अदालत ने निबंधक (अनुपालन) को इस आदेश की जानकारी 48 घंटे के भीतर अपर मुख्य सचिव (गृह) और मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को देने का निर्देश दिया।
भाषा सं राजेंद्र संतोष
संतोष