(तस्वीरों के साथ)
अयोध्या (उप्र), दो अप्रैल (भाषा) अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने बृहस्पतिवार को हनुमान जयंती के दिन अपने परिवार के साथ यहां राम मंदिर में भगवान राम की प्रार्थना की।
गौतम अदाणी के साथ उनकी पत्नी प्रीति अदाणी और बेटे करण अदाणी थे।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कहा कि अदाणी परिवार ने मंदिर में पवित्र अनुष्ठानों में भाग लिया और प्रार्थना की।
गौतम अदाणी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आज अयोध्या में हमें श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन कर प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।’’
उन्होंने कहा,‘‘श्रीराम का जीवन मर्यादा, करुणा और कर्तव्य का प्रतीक है। उनके आदर्श हमें निरंतर धर्म और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।''
अदाणी ने कहा,‘‘हनुमान जयंती के पावन अवसर पर इस पवित्र भूमि पर परिवार सहित आकर मन को असीम संतोष मिला। प्रभु श्रीराम और बजरंगबली भारत को एकता, साहस और समृद्धि का आशीर्वाद दें।''
गौतम अदाणी ने कहा कि हनुमान जयंती के दिन अयोध्या आना उनके लिए बेहद भावनात्मक और खास अनुभव था।
उन्होंने राम मंदिर से लगभग 10 मिनट की दूरी पर स्थित श्री निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय का दौरा किया। इस गुरुकुल की स्थापना 1935 में स्वामी त्यागानंद जी ने की थी।
यह संस्था आर्य समाज की परंपरा पर आधारित है, जो वैदिक शिक्षा, समाज सुधार और सर्वशिक्षा पर जोर देती है।
गौतम अदाणी ने विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ बातचीत की एवं देखा कि यहां अनुशासन, मूल्य और शिक्षा एक साथ कैसे चलते हैं।
उन्होंने कहा,‘‘जब शिक्षा मूल्यों पर आधारित होती है, तो यह केवल व्यक्तियों को आकार नहीं देती, बल्कि यह राष्ट्र के भविष्य को भी आकार देती है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन परंपराओं को आगे बढ़ाएं और आने वाले समय के लिए भी तैयार रहें।'
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया तेजी से कृत्रिम मेधा की ओर बढ़ रही है, भारत की ज्ञान परंपराओं को संरक्षित और मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अदाणी समूह की सामाजिक सेवा शाखा, अदाणी फाउंडेशन इस गुरुकुल का समर्थन करेगी और यहां एक कृत्रिम मेधा-आधारित प्रयोगशाला स्थापित करने में मदद करेगी, ताकि परंपरा और प्रौद्योगिकी एक साथ आ सकें।
इस गुरुकुल में लगभग 200 विद्यार्थी पढ़ते हैं और यहां शिक्षा पूरी तरह से निःशुल्क है।
परिसर में एक गौशाला भी है जिसमें 50 से 60 गायें रहती हैं। गुरुकुल अपने इतिहास के लिए भी जाना जाता है - अतीत में महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान नेता यहां आ चुके हैं।
जब विद्यार्थियों ने एक साथ संस्कृत श्लोकों का वाचन किया तो पूरा परिसर मंत्रोच्चार से गूंज उठा। गौतम अदाणी ने विद्यार्थियों के बीच बैठकर श्लोक सुने और शिक्षकों से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि यहां शिक्षा केवल किताबों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जीवन जीने का तरीका भी सिखाती है।
भाषा सं जफर राजकुमार
राजकुमार