नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) अमेरिका के ग्रैंडमास्टर हिकारू नाकामुरा ने साइप्रस में जारी कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के दौरान अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) के सख्त एंटी-चीटिंग (धोखाधड़ी रोधी व्यवस्था) उपायों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें “पूरी तरह बेतुका” करार दिया है।
विश्व रैंकिंग में दूसरे नंबर के खिलाड़ी ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में लागू एंटी-चीटिंग उपायों के बारे में पूछे जाने पर नाराजगी जाहिर की। यह टूर्नामेंट इस साल होने वाली विश्व चैंपियनशिप के लिए डी गुकेश को चुनौती देने वाले खिलाड़ी का फैसला करेगा।
नाकामुरा ने कहा कि खेल क्षेत्र के आसपास लगाए गए स्कैनर और मशीनों के कारण खिलाड़ियों को ऐसा महसूस हो रहा है मानो वे ईरान के भीतर काम कर रहे मोसाद (इजराइल की खुफिया एजेंसी) के एजेंट हों।
उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर नॉर्वे के ग्रैंडमास्टर जॉन लुडविग हैमर और लक्जमबर्ग की विम फियोना स्टील-एंटोनी के साथ बातचीत में कहा, ‘‘खेल में देरी, बोर्ड पर धोखाधड़ी जैसी बातों के बारे में मेरा सामान्य विचार यही है कि मैं इसे पूरी तरह बकवास मानता हूं। कमरे में खिलाड़ियों को स्कैन करने के लिए उनके पास मौजूद मशीनों की संख्या को देखते हुए, मुझे लगता है कि यह वाकई बकवास है।’’
ओपन वर्ग में कैंडिडेट्स के आठ खिलाड़ियों में शामिल नाकामुरा ने कहा कि फिडे को “हकीकत समझनी चाहिए”, क्योंकि इतने मजबूत खिलाड़ियों और बड़ी संख्या में अंपायरों की मौजूदगी में चीटिंग करना असंभव है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है यह सब बिल्कुल बकवास है। इसका मतलब यह नहीं है कि मुझे इससे कोई खास समस्या है, लेकिन मुझे लगता है कि कुछ खिलाड़ियों ने जो आशंकाएं व्यक्त की हैं, वे निराधार हैं। मैं सच कहूं तो... वे खेल से पहले और खेल के बाद हमारी जांच करते हैं।’’
नाकामुरा ने कहा, ‘‘उनके पास मेटल डिटेक्टर हैं, उनके पास अलग स्कैनर हैं, मतलब... मुझे लगता है कि हम सब क्या हैं? क्या हम ईरान में मोसाद के एजेंट हैं? हम तो शतरंज के खिलाड़ी हैं, थोड़ा यथार्थवादी बनिए।’’
नाकामुरा ने चौथे दौर में वेई यी के साथ ड्रॉ खेला और उनके खाते में अब 1.5 अंक हैं।
उनसे जब पूछा गया कि क्या उन्होंने फिडे को अपनी प्रतिक्रिया दी है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा करने की ‘कोई जरूरत नहीं’ लगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा सामान्य नजरिया यही है कि यह सब बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। छोटे ओपन टूर्नामेंट में, जहां इतने स्कैनर और उपकरण नहीं होते, वहां चिंताएं समझ में आती हैं। लेकिन इस तरह के टूर्नामेंट में, जहां सभी खिलाड़ी एक ही हॉल में होते हैं, अंपायर हर किसी पर नजर रख रहे होते हैं और कैमरे भी लगे होते हैं, अंदरूनी मदद के बिना कुछ भी संभव नहीं है। मुझे लगता है यह सब निरर्थक है।”
भारत की दो बार की विश्व रैपिड चैंपियन कोनेरू हम्पी ने साइप्रस के खाड़ी संघर्ष के निकट होने के कारण महिला वर्ग से नाम वापस ले लिया था। इस पर भी नाकामुरा ने कहा कि चिंताएं “बढ़ा-चढ़ाकर” पेश की गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘फाबी (फैबियानो कारुआना) ने भी टूर्नामेंट से पहले साइप्रस में आयोजन को लेकर चिंता जताई थी, हम्पी ने भी नाम वापस लिया। मैंने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा, लेकिन मेरा सामान्य नजरिया यही है कि इसे जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया है।”
भाषा आनन्द सुधीर
सुधीर