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Uttarakhand: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 'ऑपरेशन मानसून' शुरू, अवैध शिकारियों की होगी निगरानी

Uttarakhand: मानसून के दौरान उत्तराखंड का कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए बंद रहता है, लेकिन नेशनल पार्क के कर्मचारियों को इस दौरान आराम नहीं मिलता। टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने एक सालाना अभियान शुरू किया है। इसका नाम 'ऑपरेशन मानसून' है, जिसमें रिजर्व और उससे सटे कालागढ़ डिवीजन में कड़ी निगरानी रखी जाती है। इस अभियान का मकसद ये पक्का करना है कि शिकारी खराब सड़कों और सीमित कनेक्टिविटी का फायदा उठाकर शिकार या दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियां न कर सकें।

मानसून के दौरान नेशनल पार्क के जंगल फिर से हरे-भरे हो जाते हैं। वन्यजीवों में प्रजनन की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं। रिजर्व की समृद्ध जैव-विविधता की सुरक्षा के लिए पूरे मौसम में कड़ी निगरानी, ​​नियमित पेट्रोलिंग और स्पेशल रिस्पॉन्स टीमें अलर्ट पर रहेंगी।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर साकेत बडोला ने बताया, "देखिए, जैसे ही मानसून शुरुआत होता है, जो कि हम मानते हैं 15 जून से मानसून सीजन की शुरुआत हो जाता है। हमारा एक 'ऑपरेशन मानसून' चलाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ये है कि बारिश के समय जो सारे हमारे रास्ते हैं वो टूट जाते हैं।, जो हमारी चौकियां उनका कनेक्ट टूट जाता है। तो पेट्रोलिंग एक बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है इसमें। ताकि कोई भी शिकार की या कोई ऐसी घटना जो है वो न हो पाए। इसके अंतर्गत हमारे जो समस्त कर्मचारी हैं वो बेसिकली पैदल पेट्रोलिंग इस पूरे क्षेत्र में करते हैं। अगर मैं सिर्फ नेशनल पार्क की बात करूं, तो यहां कम से कम रोज 120 से 150 किलोमीटर तक की गश्त जो होती है हमारे कर्मचारियों द्वारा की जाती है। वैसे ही जो कालागढ़ डिवीजन है उसकी जो छह रेंज है उनमें भी लगातार गश्त की जाती है। इन गश्त के दौरान हमारे जो एटीवी हैं ऑल-टेरेन व्हीकल्स हैं, हमारे जो हाथी हैं, हमारे ड्रोन हैं इन सबका भी इस्तेमाल उसमें किया जाता है।"