मेरठ: बाराबंकी से गिरफ्तार हुए समाजवादी पार्टी के मेरठ शहर विधायक रफीक अंसारी को देर शाम कोर्ट में पेश किया गया जहां सुनवाई के बाद सपा विधायक रफीक अंसारी को एमपी एमएलए कोर्ट ने 14 दिन की न्याय हिरासत में भेज दिया। कोर्ट में विधायक की तरफ से जमानत अर्जी लगाई गई थी जिसको कोर्ट ने खारिज कर दिया। वहीं विधायक रफीक अंसारी के वकील ने स्वास्थ्य की समस्या कोर्ट को बताई थी जिसमें बताया था कि कुछ माह पहले विधायक के हार्ट का ऑपरेशन हुआ था इसके बाद कोर्ट ने उनको जेल के लिए स्वास्थ्य के लिए कानून के तहत देख रेख को भी कहा है। सपा विधायक रफीक अंसारी को लेकर देर शाम पुलिस मेरठ पहुंची। कोर्ट में पेश करने से पहले जिला अस्पताल में हेल्थ चेकअप कराया गया। इसके बाद विधायक को एसीजेएम फर्स्ट एमपी एमएलए कोर्ट में पेश किया गया। जिस समय सपा विधायक को कोर्ट में पेश किया गया वहां कोर्ट के बाहर उनके समर्थकों ने नारेबाजी भी की। सुरक्षा को देखते हुए कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था।
आपको बता दें मेरठ शहर सीट से सपा विधायक रफीक अंसारी को पुलिस ने लखनऊ से लौटते समय बाराबंकी से गिरफ्तार किया था। 1995 में जब रफीक अंसारी पार्षद थे तब बूचड़ खाने का विरोध हुआ था, हंगामा और तोडफोड भी हुई थी। 35 से 40 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था जिसमें रफीक अंसारी का भी नाम था। जिसमें सबसे पहले 1997 में वारंट जारी हुआ था जिसके बाद से अब तक वो कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। लगभग 100 से ज्यादा उनके वारंट जारी हो चुके थे, रफीक अंसारी इस मामले से बचने के लिए हाई कोर्ट भी गए थे लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
रफीक अंसारी के वकील का कहना है की अखिलेश सरकार में इस मामले को वापस भी दिया गया था लेकिन कोर्ट ने मामले को खत्म नहीं किया था। जिसके बाद NBW जारी हुए थे और अब NBW जारी होने के बाद मेरठ पुलिस ने विधायक की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की थी। रफीक अंसारी इस बात को लेकर के इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी गए थे। वही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1995 के मामले में मेरठ के विधायक रफीक अंसारी को राहत देने से इनकार कर दिया। विधायक की याचिका खारिज कर दी। याचिका में NBW के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इसलिए खारिज किया। क्योंकि, सपा के नेता 100 से अधिक गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद अदालत में पेश होने में विफल रहे। अदालत ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, एमपी/एमएलए, मेरठ की अदालत में लंबित आईपीसी की धारा 147, 436 और 427 के तहत आपराधिक मामले से संबंधित अंसारी की रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की और विधायक के खिलाफ NBW जारी कर दिए गए।
जिसके बाद मेरठ पुलिस ने विधायक की गिरफ्तारी के लिए सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी के नेतृत्व में एक टीम को गठित किया गया। इसके बाद आज लखनऊ से लौटते हुए सपा विधायक रफीक अंसारी को बाराबंकी से गिरफ्तार कर लिया गया अब उनको मेरठ लाया गया जहां उनको सबसे पहले जिला अस्पताल ले जाया गया और वहां डॉक्टरी चेकअप के बाद उनका कोर्ट में पेश किया गया। विधायक की ओर से जमानत अर्जी डाली गई जिसको अदालत में खारिज कर दिया और उनका 14 दिन के न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बताया जा रहा है कि उन पर एक और मुकदमा था जिसमें धारा 307 के तहत मुकदमा दर्ज था उसे मुकदमे का भी कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जमानत खारिज कर दी। विधायक लगभग 29 साल से कोर्ट में पेश नहीं हुए थे।
वहीं विधायक रफीक अंसारी के वकील अमित दीक्षित ने बताया कि मेरठ में 1995 में बूचड़खाने और मीट की दुकानों को लेकर कुछ हंगामा हुआ था। उसे मामले में थाना नौचंदी में मुकदमा दर्ज किया गया था। तब उसमें रफीक का नाम नहीं था। बाद में पुलिस जांच में रफीक का नाम सामने आया और उनका नाम भी मुकदमे में शामिल किया गया। चार्जशीट लगाने के बाद भी रफीक अंसारी को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई, ना ही उनके साइन हुए। इसके बाद कोर्ट में प्रोसीडिंग होती रही और मामला पेंडिंग रहा।
रिपोर्ट- प्रदीप शर्मा