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मॉक ड्रिल के पीछे क्या है मोदी सरकार की असली रणनीति

पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान से बढ़ते तनाव के बीच भारत के गृह मंत्रालय ने आज पूरे देश में मॉक ड्रिल कराए जाने के निर्देश दिए हैं. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए निर्देश में 244 सूचीबद्ध सिविल डिफेंस ज़िलों में डिफ़ेंस का अभ्यास और रिहर्सल करने को कहा गया है. साल 1971 की भारत पाकिस्तान जंग के बाद इतने बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल कराई जा रही है और इससे पता लगता है कि दोनों देशों के बीच हालात लगातार कितने बिगड़ रहे हैं.

मॉक ड्रिल में डिस्ट्रिक्ट कंट्रोलर्स, ज़िले के विभिन्न विभाग, एनसीसी, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), नेहरू युवा केंद्र संगठन (एनवाईकेएस), कॉलेज और स्कूल के स्टूडेंट्स, होम गॉर्ड्स और सिविल डिफ़ेंस वॉलंटियर्स को शामिल होने का आह्वान किया गया है.

लखनऊ के पुलिस लाइन्स में मॉक ड्रिल किया गया जिसमें आग बुझाने और लोगों को बचाने का अभ्यास किया गया. इसी तरह जम्मू के एक स्कूल में स्टूडेंट्स को मॉक ड्रिल की ट्रेनिंग दी गई. मंगलवार को पंजाब में मोहाली, अमृतसर, पटियाला, जालंधर समेत 20 जगहों पर मॉक ड्रिल का अभ्यास किया गया.

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने एक्स अकाउंट पर सभी नागरिकों, बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं, छात्रों से इस मॉक ड्रिल में वॉलंटियर बनने की अपील की है. मॉक ड्रिल में प्रमुख रूप से हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन सक्रिय करना, हमले के दौरान नागरिकों और छात्रों को आत्म-सुरक्षा का प्रशिक्षण देना, दुर्घटना के समय ब्लैकआउट उपायों को लागू करना, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को तेज़ी से छिपाना, और बचाव की योजनाओं को दुरुस्त करना और उसका अभ्यास करना शामिल है.

मॉक ड्रिल काफी हद तक तैयारी से जुड़ा मामला है, हालांकि कुछ विश्लेषक इसे पाकिस्तान पर एक 'मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कार्रवाई भी कह रहे हैं. पहलगाम हमले के बाद से ही भारत सरकार में उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं. मॉक ड्रिल के एक दिन पहले भी पीएम मोदी और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बीच मीटिंग हुई है. इससे पहले, पीएम मोदी ने सेना के तीनों विभागों के अध्यक्ष, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एनएसए के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी.