पुणे मेट्रो लाइन-3 के जल्द शुरू होने के साथ ही पुणे उन चुनिंदा भारतीय शहरों में शामिल हो जाएगा, जहां 750 वोल्ट DC थर्ड-रेल इलेक्ट्रिफिकेशन सिस्टम पर मेट्रो का संचालन होगा। यह आधुनिक तकनीक शहरी परिवहन को अधिक सुरक्षित, तेज और विश्वसनीय बनाने के लिए दुनिया के कई देशों में इस्तेमाल की जाती है।
23 किलोमीटर लंबा हिंजवड़ी-शिवाजीनगर कॉरिडोर पुणे में पहली बार इस तकनीक का उपयोग करेगा। इसमें मेट्रो ट्रेनों को बिजली ओवरहेड तारों के बजाय ट्रैक के किनारे लगी तीसरी रेल (थर्ड रेल) से मिलेगी। इससे शहर में बिजली के खंभों और तारों की जरूरत नहीं होगी और परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित दिखाई देगी।
भारत में कोलकाता मेट्रो, बेंगलुरु की नम्मा मेट्रो और कुछ अन्य आधुनिक मेट्रो परियोजनाओं में भी थर्ड-रेल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस परियोजना में कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (CBTC) जैसी अत्याधुनिक डिजिटल सिग्नलिंग तकनीक भी लगाई गई है। यह प्रणाली ट्रेनों की गति और स्थिति पर रियल-टाइम नजर रखती है, जिससे कम अंतराल पर भी सुरक्षित तरीके से मेट्रो चलाई जा सकती है।
पुणे मेट्रो लाइन-3 हिंजवड़ी के राजीव गांधी इन्फोटेक पार्क को वाकड, बानेर, बालेवाड़ी, यूनिवर्सिटी सर्कल और शिवाजीनगर जैसे प्रमुख इलाकों से जोड़ेगी। इससे आईटी सेक्टर में काम करने वाले लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। मेट्रो लाइन-3 ने पूरे 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर पर सफल ट्रायल रन पूरा कर लिया है। अब यह परियोजना अंतिम चरण में है और आवश्यक सरकारी मंजूरियों के बाद व्यावसायिक संचालन शुरू किया जाएगा।
पहले चरण में 13.3 किलोमीटर लंबे मान से आर.के. लक्ष्मण म्यूजियम तक के हिस्से पर 12 स्टेशनों के साथ मेट्रो सेवा शुरू होगी। बाद में इस लाइन को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट तक बढ़ाया जाएगा, जहां इसका कनेक्शन महा मेट्रो नेटवर्क से होगा। पूरी तरह शुरू होने के बाद शिवाजीनगर से हिंजवड़ी के बीच यात्रा का समय मौजूदा डेढ़ घंटे से घटकर लगभग 45 मिनट रह जाएगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा और शहर की ट्रैफिक समस्या को भी काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।