प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोवा में कथित बड़े पैमाने पर अवैध लौह अयस्क (आयरन ओर) खनन से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 1,023.85 करोड़ रुपये मूल्य की 130 चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) की हैं। यह मामला सलगांवकर समूह और उससे जुड़ी कंपनियों से संबंधित है।
ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में भारत में स्थित 99 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनकी कीमत लगभग 459.10 करोड़ रुपये है। इसके अलावा सिंगापुर में स्थित 31 अचल संपत्तियां करीब 471.32 करोड़ रुपये मूल्य की हैं। वहीं भारतीय कंपनियों के 93.42 करोड़ रुपये मूल्य के इक्विटी शेयर भी कुर्क किए गए हैं।
ये संपत्तियां दिवंगत अनिल वासुदेव सलगांवकर की संपदा, जिसका प्रतिनिधित्व लक्ष्मी अनिल सलगांवकर कर रही हैं, तथा समूह से जुड़ी कई कंपनियों के नाम पर हैं। इनमें सलगांवकर माइनिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, शांतीलाल खुशालदास एंड ब्रदर्स प्राइवेट लिमिटेड, एस. कांतिलाल एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, सैलिथो ओर्स प्राइवेट लिमिटेड, वर्टेक्स न्यूटन प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और सुबर्णरेखा पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
ईडी की पणजी जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 19 जून को जारी कुर्की आदेश के आधार पर यह कार्रवाई की है। एजेंसी ने बताया कि उसकी जांच गोवा अपराध शाखा (CID) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (IPC), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किए गए थे।
ईडी ने सर्वोच्च न्यायालय के 21 अप्रैल 2014 और 7 फरवरी 2018 के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि 22 नवंबर 2007 के बाद और नए खनन पट्टे जारी होने तक गोवा में की गई खनन गतिविधियां अवैध और बिना वैध अधिकार के थीं। जांच के अनुसार, एवीएस समूह ने वर्ष 2007 से 2012 के बीच 10 खनन पट्टों का संचालन किया और अवैध रूप से लौह अयस्क के खनन, बिक्री और निर्यात के जरिए 2,492.95 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।
ईडी का आरोप है कि अवैध रूप से निकाले गए लौह अयस्क को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) में स्थापित शेल कंपनियों को बेहद कम कीमत पर निर्यात किया गया। ये कंपनियां केवल कागजी मध्यस्थ के रूप में काम करती थीं और बाद में इस अयस्क को चीन में ऊंची कीमत पर बेच देती थीं।एजेंसी के अनुसार, इस व्यवस्था से लगभग 2,744.89 करोड़ रुपये का विदेशी व्यापार लाभ अर्जित किया गया, जिससे कुल अपराध की आय 5,237.84 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। ईडी का दावा है कि इस धन को बीवीआई और सिंगापुर स्थित विशेष प्रयोजन कंपनियों (SPVs) के माध्यम से कई स्तरों पर घुमाया गया, विदेशों में संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया गया और इसका एक हिस्सा शेयर पूंजी के रूप में भारत वापस लाया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।