Breaking News

CUET UG 2026: तकनीकी गड़बड़ी की बात NTA ने मानी, दोबारा होगी प्रभावित छात्रों की परीक्षा     |   नोएडा के स्पार्क मिंडा फैक्ट्री में लगी भीषण आग, आग बुझाने में जुटी दमकल की 6 गाड़ियां     |   दिल्ली में आंधी-तूफान का खतरा, IMD का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी     |   'मेरा क्या हाल किया गया, सबने देखा', सोनारपुर में हमले के बाद अभिषेक बनर्जी का BJP पर निशाना     |   ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक पर हमला     |  

आपके मोबाइल पर भी तेज अलार्म के साथ आया Alert, जानिए इसका कारण

अगर आपके मोबाइल में भी तेज अलार्म के साथ एनडीएमए अलर्ट एसएमएस आया है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार नई आपदा चेतावनी प्रणाली का देशभर में परीक्षण कर रही है। दरअसल, सरकार और NDMA पूरे देश में नई सेल ब्रॉडकास्ट आपदा चेतावनी प्रणाली का परीक्षण कर रहे हैं। इस सिस्टम के जरिए भूकंप, सुनामी, बिजली गिरने और गैस लीक जैसी आपात स्थितियों में मोबाइल फोन पर सीधे अलर्ट भेजे जाएंगे।

भारत सरकार ने देशभर में मोबाइल आधारित आपदा चेतावनी प्रणाली का परीक्षण शुरू कर दिया है। यह परीक्षण नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) की ओर से किया जा रहा है। इस दौरान कई लोगों के मोबाइल पर फ्लैश एसएमएस और तेज अलार्म के साथ चेतावनी संदेश पहुंच रहे हैं, जिससे कई यूजर्स घबरा भी गए हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये सिर्फ सिस्टम टेस्टिंग का हिस्सा है

क्या है Cell Broadcast Alert System?
यह एक हाईटेक आपातकालीन चेतावनी प्रणाली है, जिसके जरिए सरकार किसी भी आपदा या खतरे की स्थिति में सीधे मोबाइल फोन पर अलर्ट भेज सकेगी। इसका इस्तमाल भूकंप, सुनामी, बिजली गिरना, बाढ़, गैस लीक और रासायनिक खतरे समेत अन्य मानव-निर्मित आपात स्थितियां में किया जा सकेगा।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?
जिन यूजर्स के फोन पर यह मैसेज जाएगा, उनके मोबाइल फोन पर तेज सायरन जैसी आवाज करेगा, फिर स्क्रीन पर फ्लैश मैसेज दिखेगा। यूजर को तत्काल चेतावनी भी मिलेगी। ये प्रणाली खासतौर पर प्रभावित क्षेत्र के लोगों तक तुरंत सूचना पहुंचाने के लिए तैयार की गई है।

SACHET सिस्टम से भेजे जाएंगे अलर्ट
सरकार के अनुसार ये अलर्ट स्वदेशी Integrated Alert System ‘SACHET’ के जरिए भेजे जाएंगे। इसे C-DOT (Centre for Development of Telematics) ने विकसित किया है। यह सिस्टम कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है, जिसकी सिफारिश इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशन यूनियन (ITU) ने की है।