संगम नगरी प्रयागराज में शारदीय नवरात्र के मौके पर 'काली स्वांग' परंपरा के तहत खूबसूरत नजारा देखने को मिला। हर साल देश-विदेश से श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा को देखने आते हैं। इस दौरान मां काली की वेशभूषा में कलाकार खोपड़ियों जैसी माला पहन सड़कों पर उतरते हैं। कहा जाता है कि ये रिवाज 200 साल से चला आ रहा है। इस अनोखी परंपरा के लिए कलाकारों का सिलेक्शन प्रोसेस छह महीने पहले शुरू हो जाता है। इसमें कलाकारों का सिलेक्शन करने के साथ उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाती है। प्रयागराज में इसे 'काली स्वांग' के नाम से जाना जाता है। काली स्वांग में मां सीता काली के परिधान में मर्यादा पुरुषोत्तम रामचंद्र के रथ के आगे भुजाली लेकर चलती हैं। इस दौरान खर-दूषण वध किया जाता है। खर-दूषण नाम के राक्षसों के वध का जिक्र पौराणिक कथाओं में भी मिलता है।
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