जम्मू कश्मीर के पर्यटन उद्योग को बेसब्री से आगामी बजट का इंतजार है। उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें बजट से काफी उम्मीदें हैं। उद्योग से जुड़े लोगों को लगता है कि सरकार कश्मीर में पर्यटन के विकास के लिए दिल खोल कर धन आवंटित करेगी। घाटी को तीन दशक से ज्यादा समय से आतंकवाद और हिंसा का दंश झेलना पड़ा है।
वे खास कर ढांचागत विकास और दूरदराज की जगहों को विकसित करना चाहते हैं, ताकि पर्यटन के दीर्घकालीन विकास का दायरा बढ़े। सैकड़ों हाउसबोट और शिकारा मालिकों को हर साल कश्मीर के अनिश्चित मौसम का सामना करना पड़ता है। उन्हें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण से उम्मीद है कि वे अर्से से चली आ रही उनकी मांगों पर जरूर ध्यान देंगी।
अगस्त 2019 में पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के बाद ये केंद्र शासित प्रदेश के लिए छठा बजट होगा। पर्यटन को कश्मीर की अर्थव्यवस्था का बुनियाद माना जाता है। पिछले पांच सालों में इस सेक्टर का अच्छा विकास हुआ है। इसमें केंद्र के साथ-साथ जम्मू कश्मीर प्रशासन का भी काफी योगदान है।
घाटी में साल 2024 में करीब दो करोड़ तीस लाख सैलानियों की आमद हुई। इससे पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों में विकास और समृद्धि की आस जागी है। अब केंद्रीय बजट आने में कुछ ही दिन बचे हैं। पर्यटन से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि बजट में उनकी जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी।