लाल गढ़ की धरती पर लोकतंत्र का गुलाल उड़ने लगा है। लोकतंत्र का उत्सव निरसा की धरती पर चरम पर है। सुबह छह बजे से मतदान केंद्रों पर कतार लग गई। ग्रामीण अंचलों के मतदाताओं ने एक बार फिर अपनी सहभागिता से सबको चौंका दिया।
उनकी उत्सुकता और संजीवनी शक्ति ने यह प्रमाणित कर दिया कि लोकतंत्र का सच्चा उत्साह आज भी गांव की गलियों में धड़कता है। इस महायज्ञ में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने इस पर्व को और भी जीवंत बना दिया।
जिस मतदान केंद्र पर जाएं, भीड़, कतार लेकिन सबकुछ व्यवस्थित। लोग आ रहे थे। कतार में लग रहे थे। अपनी बारी आने तक धैर्य के साथ इंतजार कर रहे थे। वोट डालने के बाद चेहरे पर मुस्कराहट लिए सहज भाव से वापस लौट रहे थे।