तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री शेखर बाबू ने सोमवार को तमिलनाडु और केरल के बीच विवादित भूमि पर स्थित सदियों पुराने मंगलादेवी कन्नगी मंदिर का दौरा किया। मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद उन्होंने जल्द से जल्द सभी विवादों को सुलझाने की बात कही। मंदिर केवल चित्रा पूर्णिमा के दिन भक्तों के लिए खोला जाता है।
हालांकि, किसी भी विवाद से बचने के लिए उन्हें केवल थेनी और इडुक्की दोनों जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ-साथ वन अधिकारियों की मौजूदगी में ही प्रवेश और पूजा करने की इजाजत है। मंदिर वर्तमान में केरल के इडुक्की जिले के अधिकार क्षेत्र में है। लेकिन तमिलनाडु सरकार का दावा है कि मंदिर मूल रूप से राज्य का था।
वो ऐतिहासिक अभिलेखों और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रशासनिक नियंत्रण वापस लेना चाहती है, जिसने शुरू में मंदिर को थेनी जिले के अधीन रखा था। मंत्री शेखर बाबू ने कहा कि केरल उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में कई मामले सुनवाई के अधीन हैं।