पिछले कुछ सालों में पहली बार राज्यसभा में बीजेपी के सदस्यों की संख्या 90 से नीचे आ गई है. हालांकि, मौजूदा रिक्तियों को भरने के लिए होने वाले उपचुनाव के बाद बीजेपी और उसके सहयोगी दल ना सिर्फ हालिया नुकसान की भरपाई कर सकेंगे बल्कि अपनी स्थिति को और भी मजबूत कर लेंगे.