उत्तर प्रदेश का आजमगढ़ सामाजिक न्याय की पॉलिटिक्स का प्रयोगशाला कहा जाता है. बसपा के संस्थापक कांशीराम ने बहुजन सियासत की सियासी जमीन तैयार की, तो मुलायम सिंह यादव यहीं से मुस्लिम-यादव (एमवाई) समीकरण को अमली जामा पहनाने में कामयाब रहे. बसपा और सपा के दबदबे वाली आजमगढ़ सीट पर बीजेपी 13 साल के बाद 2022 के उपचुनाव में भगवा फहराने में कामयाब रही थी. बीजेपी ने एक बार फिर से दिनेश लाल यादव निरहुआ पर दांव खेला है, तो सपा ने भी धर्मेंद्र यादव पर भरोसा जताया है. बसपा से मशहूद अहमद मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं. ऐसे में धर्मेंद्र यादव को जिताने के लिए उनके चाचा से लेकर भइया-भाभी और भतीजी तक जुटी हुई हैं.