महाकाल की नगरी उज्जैन को सिंहस्थ-2028 से पहले देश के सबसे बड़े धार्मिक विकास मॉडल के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत पहली बार 200 करोड़ रुपये के ‘टेंपल बॉन्ड’ जारी करने की योजना बनाई जा रही है। इस पहल के माध्यम से उज्जैन और आगर-मालवा जिले के 11 प्रमुख मंदिरों का करीब 1100 करोड़ रुपये की लागत से कायाकल्प किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के विकास के साथ-साथ पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
संभागायुक्त आशीष सिंह ने संबंधित अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। वहीं, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी और सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि शिप्रा नदी के तट पर भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली से जुड़ी स्मृतियों को सहेजने के लिए भव्य ‘श्रीकृष्ण लोक’ विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की एक विशाल प्रतिमा स्थापित करने की भी योजना है।
अधिकारियों का मानना है कि इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से उज्जैन को विश्वस्तरीय धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में नई पहचान मिलेगी। साथ ही पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित विकास कार्यों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।