शिवसेना (UBT) में हाल ही में हुई टूट के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार शाम 5 बजे पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई है। शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई स्पीकर से मुलाकात कर पार्टी का पक्ष रखेंगे। ठाकरे गुट के नेताओं को स्पीकर के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए बुलाया गया है। बताया जा रहा है कि सावंत और देसाई स्पीकर से अनुरोध करेंगे कि एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए बागी सांसदों को अलग समूह के रूप में मान्यता न दी जाए।
दरअसल, सोमवार को शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसद—संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमप्रकाश निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश पाटिल अष्टीकर—औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। इसे शिंदे गुट की बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के "गद्दारों" के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात कही। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि महाराष्ट्र के गद्दारों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा और उनका हौसला बुलंद है। वहीं, शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे ने भी एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए अपने हमले तेज कर दिए हैं।
दूसरी ओर, शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हस्के ने पार्टी में टूट के लिए संजय राउत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यह सब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व और जनता के विश्वास का परिणाम है। म्हस्के का दावा है कि अभी छह सांसद शामिल हुए हैं और आने वाले समय में अन्य नेता भी शिंदे गुट का दामन थाम सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि संजय राउत पार्टी पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि नाराज हैं। उनके अनुसार, पार्टी से पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण कई नेता दूसरा रास्ता चुन रहे हैं। शिवसेना (UBT) में हुई इस टूट के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हैं।