जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें सभी से जंतर-मंतर या उसके आसपास होने वाले किसी भी प्रदर्शन या भीड़ में शामिल होने या वहां जाने से बचने को कहा गया है। विश्वविद्यालय ने यह सलाह सार्वजनिक प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए जारी की है।
एडवाइजरी में कहा गया, "JNU समुदाय से जुड़े सभी लोगों से जिम्मेदारी से व्यवहार करने और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की जाती है। भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट के सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े निर्देशों के अनुसार, आपसे अनुरोध है कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर या उसके आसपास होने वाले किसी भी प्रदर्शन में शामिल होने या वहां जाने से बचें।"
विश्वविद्यालय ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी बरतने की सलाह दी है। एडवाइजरी में कहा गया, "कृपया सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से व्यवहार करें। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ विश्वविद्यालय के आचार संहिता के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।"
JNU ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से अकादमिक जिम्मेदारी और जिम्मेदार नागरिकता के मूल्यों को बनाए रखने की भी अपील की है। वहीं, CJP के प्रवक्ता दीपक बल्यान ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने तक प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा। उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने के सरकार के आश्वासन को भी नाकाफी बताया।
CJP प्रवक्ता ने कहा, "CJP का साफ कहना है कि यह प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय शिक्षा मंत्री) इस्तीफा नहीं देते। पीएम मोदी कहते हैं कि मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी, लेकिन ये सिर्फ बातें हैं। हमें इन पर भरोसा नहीं है, क्योंकि पहले भी कई बार युवाओं के साथ धोखा हुआ है। युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और परेशान हैं।" उन्होंने आगे कहा, "लेकिन अब देश के युवा जाग चुके हैं और ऐसी बातों से उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता। उनकी सीधी मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है, ताकि जवाबदेही तय हो सके। हमारी यह लड़ाई जवाबदेही और जिम्मेदारी के लिए है।"