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कांग्रेस को 'रेस के घोड़ों' और दूसरों में अंतर करना होगा... जानिए राहुल गांधी के इस बयान का क्या है मतलब?

Madhya Pradesh: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'लंगड़े घोड़े' वाले बयान से ऐसा संकेत मिल रहा है कि पार्टी में अब बदलाव का समय आ गया है। गांधी ने कहा कि काम न करने वाले नेता 'सेवानिवृत्त' हो जाएं और पार्टी की कमान 'रेस के घोड़ों' को सौंपी जाए।

राहुल गांधी ने कहा, "और आप में से ऐसे लोग होंगे जो पूरी शक्ति के साथ, दिल के साथ कांग्रेस पार्टी के लिए काम करते हैं और ऐसे भी लोग होंगे जो थोड़ा थक गए हैं या जिनका मूड ठीक नहीं है जो ज्यादा टेंशन लिए हैं। अब 'रेस के घोड़े' और 'बारात के घोड़े' को अलग तो करना ही पड़ेगा और पहले मैं कहता था दो टाइप के हैं। एक रेस का घोड़ा है, कांग्रेस पार्टी कभी-कभी रेस के घोड़े को बारात में भेज देती है। ये कमलनाथ ने कहा है और कभी-कभी बारात के घोड़े को, रेस की लाइन में खड़ा कर देती है। उसको पीछे से वो एक चाबुक पड़ता है, वो वहीं बैठ जाता है। मगर एक तीसरी कैटेगरी है एक हुआ बारात का, दूसरा हुआ रेस का, तीसरा भी होता है कौन-सा होता है? लंगड़ा, लंगड़ा घोड़ा। तो ये छांटना है हमें। रेस का कौन-सा है, बारात का कौन-सा है, लंगड़ा कौन-सा है।"