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जयपुर में है शीतला माता का बड़ा मंदिर, बसौड़ा की परंपरा निभाने पहुंचे हजारों श्रद्धालु

Rajasthan: राजस्थान के जयपुर में आज बसौड़ा मनाया गया। इस मौके पर बीते दिन बनाए गए खाने को खाया जाता है। जयपुर के चाकसू इलाके में शीतला माता मंदिर में हजारों श्रद्धालु बसौड़े पर देवी के दर्शन के लिए पहुंचे और पौराणिक परंपरा को निभाया।

बसौड़ा शब्द हिंदी शब्द 'बासी' से बना है, इसका मतलब एक दिन पहले बनाए गए खाने से है। बसौड़ा पर शीतला माता की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार शीतला माता चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा करती हैं।

'शीतला' माता को शीतल यानी ठंडा माना जाता है। बसौड़ा पर देवी को केवल ठंडे खाद्य पदार्थ ही अर्पित किए जाते हैं। बसौड़े से बासी खाना बंद करने और सर्दी का मौसम आने तक ठंडा खाना खाने की शुरुआत का संकेत मिलता है।

इस दिन श्रद्धालु खाना पकाने के लिए चूल्हा नहीं जलाते। वे जो कुछ भी खाते हैं, वह बीते दिन ही तैयार कर लेते हैं। जयपुर के चाकसू इलाके में शीतला माता का बड़ा मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण चक्षु नामक एक स्थानीय राजा ने करवाया था, क्योंकि देवी ने उनके पुत्र की चेचक की बीमारी को ठीक कर दिया था।

जयपुर से चाकसू की दूरी तकरीबन 40 किलोमीटर है। बसौड़े के मौके पर हर साल हजारों श्रद्धालु शीतला माता के दर्शन करने आते हैं और अपने बच्चों को बीमारियों से दूर रखने का आशीर्वाद मांगते हैं।