स्वतंत्रता दिवस से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ पर आयोजित शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ नाम की पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। ‘वंदे मातरम्’ पुस्तिका बच्चों की बनाई पेंटिंग्स पर आधारित है, जबकि ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ पुस्तिका काकोरी के शहीदों और आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित है। इस मौके पर देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले महान क्रांतिकारियों और वीर सैनिकों के परिवारों को भी सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 15 अगस्त को हर घर में देश की आन, बान और शान का प्रतीक तिरंगा लहराना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के हर संस्थान में ‘वंदे मातरम्’ का गायन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के क्रांतिकारियों का एक ही उद्देश्य था—भारत माता को आजाद कराना। योगी ने कहा कि जिन लोगों ने देश की युवा पीढ़ी को अपने क्रांतिकारियों और वीर नायकों के इतिहास से दूर रखा, उन्होंने युवाओं के साथ सबसे बड़ा अन्याय किया।
सीएम योगी ने कहा कि अंग्रेजों ने काकोरी ट्रेन एक्शन को ‘डकैती’ बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आजाद भारत में भी पिछली सरकारों ने इसे ‘काकोरी डकैती कांड’ कहकर इस घटना से जुड़े क्रांतिकारियों का अपमान किया। उन्होंने कहा कि इस घटना से जुड़े कई क्रांतिकारियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी और कुछ महान क्रांतिकारियों को दिसंबर 1927 में फांसी दी गई। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज भी देश विरोधी ताकतें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर भारत के खिलाफ अफवाहें फैलाने और समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत लखनऊ में ‘तिरंगा यात्रा विद यूथ’ का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा सभी स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के प्रति आभार व्यक्त करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नेशन फर्स्ट’ के मंत्र को आगे बढ़ाने का संकल्प है। उन्होंने तिरंगा यात्रा में शामिल होने वाले युवाओं को शुभकामनाएं दीं।
काकोरी ट्रेन एक्शन 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के पास हुआ था। हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ हथियार खरीदने के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से ट्रेन को रोका था। राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाकउल्ला खान समेत क्रांतिकारियों ने शाहजहांपुर-लखनऊ ट्रेन को रोककर करीब 8,000 रुपये जब्त किए थे। इसके बाद अंग्रेजी शासन ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कीं और कई प्रमुख क्रांतिकारियों को दिसंबर 1927 में फांसी दे दी गई।