मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल विजय दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री आवास में आयोजित सैनिक सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों को सम्मानित किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान की गौरवशाली कहानी है। उन्होंने कहा कि बेहद कठिन मौसम और दुर्गम पहाड़ियों के बावजूद भारतीय जवानों ने बहादुरी से लड़ते हुए देश को जीत दिलाई।
सीएम धामी ने कहा कि जब भी वीरता और बलिदान की बात होती है, उत्तराखंड का नाम गर्व से लिया जाता है। राज्य के लगभग हर दूसरे परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना में सेवा दे रहा है। उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के 75 वीर जवानों ने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इन वीर जवानों का बलिदान हमेशा देश और प्रदेश के लोगों को प्रेरणा देता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों का सम्मान और देश की सुरक्षा राजनीति का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना लगातार मजबूत और आधुनिक हो रही है। भारत अब आतंकवादी हमलों का जवाब केवल निंदा से नहीं देता, बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के जरिए दुश्मनों को करारा जवाब देता है।
उन्होंने कहा कि सेना को आधुनिक और स्वदेशी हथियारों से लैस किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, सुरंग और पुल जैसी जरूरी सुविधाओं का भी तेजी से विकास हो रहा है। वन रैंक-वन पेंशन योजना के जरिए पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को भी लाभ मिला है।
सीएम धामी ने बताया कि उत्तराखंड सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए कई कदम उठा रही है। शहीदों के परिवारों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है। वीरता पुरस्कार पाने वाले सैनिकों को मिलने वाली सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है।
उन्होंने कहा कि शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया गया है। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की समय सीमा भी 2 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है। शहीद परिवारों के लिए नौकरी से पहले प्रशिक्षण और बेटियों की शादी के लिए सहायता जैसी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि परमवीर चक्र विजेताओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये किया गया है। देहरादून के गुनियाल गांव में बन रहा सैन्य धाम भी निर्माण के अंतिम चरण में है। यह देश के शहीद सैनिकों और उत्तराखंड की सैन्य परंपरा को समर्पित होगा।
सीएम धामी ने कहा कि सरकार अग्निवीरों के भविष्य को लेकर भी गंभीर है। सेवामुक्त अग्निवीरों की रोजगार संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए देश का पहला अग्निवीर रोजगार सेल बनाने का निर्णय लिया गया है। पुलिस, वन विभाग और अन्य सरकारी नौकरियों में सेवामुक्त अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। स्वरोजगार करने वाले अग्निवीरों को मुफ्त कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पूर्व सैनिकों और सेवामुक्त अग्निवीरों को पहाड़ी क्षेत्रों में होमस्टे शुरू करने के लिए विशेष आर्थिक सहायता देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। सीमावर्ती गांवों में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को रोजगार से जोड़ने के लिए भी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी मांग पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। सैन्य परिवारों से जुड़े जमीन धोखाधड़ी के मामलों को भी जल्द निपटाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति से जुड़े कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य और कविता के जरिए राष्ट्रप्रेम की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, वीर सैनिक, पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, शहीदों के परिजन, सैन्य अधिकारी, कवि और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।