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CM भूपेंद्र पटेल ने स्मार्ट स्कूल सुविधाओं का किया निरीक्षण, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समिति से की बातचीत

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को कहा कि वर्ष 2003 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘कन्या केलवाणी’ और ‘शाला प्रवेशोत्सव’ अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से यह जन-उत्सव का रूप ले चुका है।

24वें शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवाणी महोत्सव 2026 के तीसरे दिन मुख्यमंत्री ने अहमदाबाद जिले के पिंपन और साणंद मॉडल स्कूल में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत किया। राज्य में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने और 100 प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण आज गुजरात में स्कूलों में 100 प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य हासिल किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उनके अभिभावकों की काउंसलिंग कर रही है और उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए काम कर रही है। उन्होंने अभिभावकों से आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और भविष्य को भी प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

साणंद मॉडल स्कूल में इस अवसर पर कुल 209 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ, जिनमें कक्षा 9 के 142 छात्र, कक्षा 11 सामान्य वर्ग के 50 छात्र और कक्षा 11 विज्ञान वर्ग के 17 छात्र शामिल हैं। मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने विद्यार्थियों को शैक्षणिक किट वितरित कर उनका स्वागत किया। शाला प्रवेशोत्सव की सफलता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दो दशक पहले शुरू की गई यह पहल आज शिक्षा क्षेत्र का एक ऐतिहासिक अभियान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के चेहरों पर दिखने वाला आत्मविश्वास और उत्साह इस कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने साणंद के औद्योगिक विकास की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है और साणंद देश का एक प्रमुख सेमीकंडक्टर हब बनकर उभर रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र के बच्चों को वैश्विक स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की छवि में इतना सुधार हुआ है कि अब इनमें प्रवेश के लिए सिफारिशों की जरूरत पड़ रही है, जो राज्य की शिक्षा नीति की बड़ी उपलब्धि है।

पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के दौर में हर बूंद वर्षा जल का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘कैच द रेन’ अभियान का उल्लेख करते हुए वर्षा जल को धरती में पुनर्भरण करने का आह्वान किया। साथ ही ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रत्येक नागरिक से एक पेड़ लगाने और उसका संरक्षण करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला योजना और आवास योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के पात्र लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। ‘प्रगति नो प्रवेशोत्सव’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। विद्यालय के 100 प्रतिशत परीक्षा परिणाम के लिए प्राचार्य विनोदभाई मगवाडिया का सम्मान किया गया, जबकि विद्यालय के विकास में योगदान देने वाले दानदाताओं को भी सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने साणंद मॉडल स्कूल के परिसर का दौरा कर गतिविधि-आधारित विज्ञान प्रयोगशाला और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने परिसर में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय छात्रावास का भी अवलोकन किया और वहां की सुविधाओं की समीक्षा की। इसके अलावा उन्होंने स्कूल प्रबंधन समिति (SMC), स्कूल प्रबंधन एवं विकास समिति (SMDC) और अभिभावकों के साथ संवाद किया। चर्चा के दौरान विद्यालय के समग्र विकास, ड्रॉपआउट दर कम करने और शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरियाली का संदेश दिया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों, अभिभावकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।