नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। उनके साथ पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तमिलनाडु से निर्वाचित अन्य सांसदों ने भी शपथ ग्रहण की। कुल 19 नेताओं ने आज शपथ ली, जिनमें केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, डीएमके के तिरुची शिवा, भाजपा के रामराव वाडकुटे और मनमोहन सामल, बीजेडी के संत्रुप्त मिश्रा, बीजेडी-कांग्रेस समर्थित दिलीप कुमार रे, डीएमके के कॉन्स्टैंडाइन रविंद्रन, डीएमडीएल के एलके सुधीश और कांग्रेस के क्रिस्टोफर मणिकम शामिल हैं।
यह शपथ ग्रहण शरद पवार, रामदास अठावले सहित कई नेताओं की वापसी को दर्शाता है, जो अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा निर्वाचित हुए हैं। लोकसभा में लंबे समय तक रहने के बाद शरद पवार 2014 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नव-निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई।
राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 10 राज्यों में द्विवार्षिक चुनाव 16 मार्च को हुए थे और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना भी संपन्न हुई थी। महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना से चुने गए 37 सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है, जिससे नई सीटें खाली हुईं।
इसी बीच, बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार 10 अप्रैल को औपचारिक रूप से राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले हैं। इसकी पुष्टि बिहार भाजपा नेता संजय सराओगी ने रविवार को की। पिछले महीने हुए राज्यसभा चुनावों में काफी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। नीतीश कुमार के राज्य की राजनीति से हटने की खबर पर जेडीयू कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया, वहीं विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भाजपा पर निशाना साधा। ओडिशा में क्रॉस वोटिंग के चलते बीजेडी ने छह विधायकों को निलंबित कर दिया, जबकि हरियाणा में कांग्रेस ने मतगणना के दौरान अनियमितताओं और क्रॉस वोटिंग के आरोप लगाए।