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देवउठनी एकादशी पर श्रद्धालु लगा रहे आस्था की डुबकी, कर रहे तुलसी विवाह का अनुष्ठान

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में शनिवार को देवउठनी एकादशी मनाई जा रही है। इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि ये वो दिन है जब भगवान विष्णु चतुर्मास यानी चार महीने की अपनी योगनिद्रा से जागते हैं और सृष्टि का काम संभालते हैं। इस दिन से ही विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू होते हैं।

इस खास दिन हजारों श्रद्धालु पंचकोसी परिक्रमा के लिए उत्तर प्रदेश में रामनगरी अयोध्या पहुंचे। पंचकोसी परिक्रमा अयोध्या धाम क्षेत्र के भीतर पांच कोस यानी करीब 10 से15 किलोमीटर की दूरी तय करती है। धार्मिक मान्यता है कि इस परिक्रमा से शरीर के पांच तत्वों की शुद्धि होती है और कई जन्मों के पाप मिट जाते हैं।

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सभी जरुरी इंतजाम किए हैं। चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। पवित्र शहर प्रयागराज और वाराणसी भी आध्यात्मिक उत्साह में डूबे हुए हैं। देवउठनी एकादशी पर हजारों श्रद्धालु पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं और तुलसी विवाह का अनुष्ठान करते हैं। इस दिन माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का दिव्य विवाह किया जाता है।

भगवान शालिग्राम एक पवित्र काला पत्थर है जिसे भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है जबकि तुलसी के पवित्र पौधे को देवी के रूप में पूजा जाता है। चातुर्मास का मतलब उन चार महीनों से है जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन रहते हैं और देवता निष्क्रिय माने जाते हैं।

चातुर्मास के दौरान श्रद्धालु विवाह, सगाई और गृह प्रवेश सहित सभी शुभ समारोहों के आयोजन से बचते हैं। इसीलिए देवउठनी एकादशी का महत्व ज्यादा है। भगवान विष्णु का योगनिद्रा से जागना और सृष्टि के काम संभालना नवीनीकरण और मांगलिक शुरुआत का प्रतीक है।