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यह मंदिर है कोई पर्यटन स्थल नहीं, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर मंदिर समिति

Uttarakhand: श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के प्रबंधन में आने वाले मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर बहस तेज हो गई है। समिति ने कहा है कि मंदिर पर्यटन स्थल नहीं हैं और इनमें प्रवेश नागरिक अधिकारों का मामला नहीं है।

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा, “केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पर्यटन स्थल नहीं हैं। ये आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित वैदिक परंपरा के केंद्र हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय को अपने धार्मिक मामलों पर फैसला लेने का अधिकार प्राप्त है।”

उन्होंने कहा, “ये निर्णय किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, अनुशासन व पवित्रता की रक्षा करने के लिए है।” द्विवेदी ने कहा कि जैसे मस्जिदों और गिरजाघरों में धार्मिक आचार-व्यवहार से संबंधित नियम होते हैं, वैसे ही हिंदू धार्मिक स्थलों पर भी पारंपरिक नियम होते हैं। उन्होंने कहा, “सनातन धर्म में आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति का केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में स्वागत है।”

जब उनसे उत्तराखंड के राज्यपाल, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह समेत लंबे समय से केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम का दर्शन करते आ रहे सिख और जैन श्रद्धालुओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये मुद्दा किसी विशेष धर्म का नहीं है, बल्कि आस्था व धार्मिक अनुशासन का है।

सिंह स्वयं सिख हैं और मंदिरों के पट खोले जाने के मौके पर दोनों धामों में मौजूद थे। द्विवेदी ने कहा, “जो कोई भी सनातन परंपरा में आस्था रखता है, उसके लिए कोई प्रतिबंध नहीं है।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले कहा था कि सरकार इस मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगी और सभी संबंधित पक्षों के विचारों को सुनेगी।

इस पर द्विवेदी ने कहा, “ये हमारे प्राचीन पूजा स्थल हैं। धार्मिक संगठनों, पुजारियों, संतों और स्थानीय संस्थाओं के विचारों को ध्यान में रखा जाएगा जो इन स्थलों के प्रबंधन और संचालन से जुड़े हैं। इन स्थलों से संबंधित कुछ कानून पहले बनाए गए थे, और उनकी भी पुनः समीक्षा की जा रही है। विस्तृत कार्रवाई उसी आधार पर की जाएगी।’’

हालांकि, विपक्ष ने इस मामले में पाखंड का आरोप लगाया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि कई तीर्थ स्थलों में पहले से ही स्थानीय नियम व परंपराएं लागू हैं, लेकिन इस मुद्दे को राजनीतिक मोड़ दिया जा रहा है।

हरीश रावत ने कहा, “यदि प्रतिबंध लगाना है, तो उसे एक साथ सभी जगह लागू किया जाना चाहिए। कई तीर्थ स्थलों जैसे हर की पौड़ी पर पहले से ही नगर निगम कानून में यह निर्धारित किया गया है कि कौन कहां रह सकता है। लेकिन ये बीजेपी का पाखंड है। दुनिया के अन्य धर्म दूसरों को अपनी धार्मिक मान्यताएं साझा करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, और यहां प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।”

उन्होंने ये भी कहा कि गैर-हिंदुओं ने देश के कई मंदिरों के निर्माण में योगदान दिया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।