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एंटी-पेपर लीक बिल पर जितेंद्र सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले- क्या उन्हें संसद के नियमों की जानकारी है?

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए राहुल गांधी पर कई निशाने साधे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस नेता को संसद के बुनियादी नियमों की जानकारी भी है। जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी पर असंसदीय भाषा के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया। मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के पहले इस्तेमाल किए गए एक शब्द का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या उन्होंने देश के युवाओं के लिए भी इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान सुझाव देने के बजाय राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को, जो देश का भविष्य हैं, "इडियट्स" कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

इससे पहले भाजपा सांसदों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई कथित टिप्पणी को लेकर माफी मांगने की मांग की थी। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आरोपों पर जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर कोई गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा कि गोली चलाने का कोई आदेश दिया ही नहीं गया था और ऐसे आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है।

जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री न बन पाने से निराश और हताश होकर राहुल गांधी 7 लोक कल्याण मार्ग के गेट पर जाकर बैठ गए थे। उन्होंने कहा कि जब उन्हें समझाया गया कि इस तरह का व्यवहार उनके पद के अनुरूप नहीं है, तो उन्होंने उन्हें वहां से हटाने की बात कही।

वहीं, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए सजा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत न्यूनतम सजा को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल और अधिकतम सजा को पांच साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव है। वहीं, अधिकतम जुर्माने को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है।

अपराध में शामिल सेवा प्रदाताओं के लिए अधिकतम जुर्माना बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। साथ ही, किसी भी सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंध की अवधि को चार साल से बढ़ाकर आठ साल किया जाएगा। संगठित परीक्षा संबंधी अपराधों के लिए न्यूनतम सजा को पांच साल से बढ़ाकर सात साल करने और अधिकतम सजा 10 साल तक रखने का प्रस्ताव है। ऐसे मामलों में अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया जाएगा।

विधेयक में केंद्र सरकार को पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार देने का भी प्रावधान है। इसके अलावा, नई धारा 12A के तहत जांच को दो महीने के भीतर पूरा करने का प्रस्ताव है। विधेयक में अपराधों की रोजाना सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित करने और चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का प्रावधान भी है। प्रत्येक स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए विशेष सरकारी वकील नियुक्त करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।