Breaking News

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मॉनसून सत्र आज से शुरू     |   J-K BJP चीफ सत शर्मा ने CM उमर अब्दुल्ला को मानहानि का लीगल नोटिस भेजा     |   SC ने गुवाहाटी HC के 27 लोगों को विदेशी घोषित करने के फैसले को रद्द किया     |   दिल्ली की हवा फिर खराब, AQI 261 के पार पहुंचा     |   बद्रीनाथ चढ़ावा चोरी में एक्शन, हिरासत में BKTC कमेटी अध्यक्ष का निजी सचिव     |  

संसद के मानसून सत्र से पहले 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक, सरकार बताएगी एजेंडा, विपक्ष उठाएगा अहम मुद्दे

संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले 19 जुलाई को केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सरकार अपने विधायी एजेंडे की जानकारी देगी, जबकि विपक्ष सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों से सरकार को अवगत कराएगा। यह बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। संसद के हर सत्र से पहले सरकार सभी दलों के साथ बैठक कर सत्र को सुचारु रूप से चलाने पर चर्चा करती है।

इस बार सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक (बिल) संसद में पेश करने की तैयारी में है। वहीं, सत्र के दौरान कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष NEET-UG पेपर लीक मामला और ऑपरेशन सिंदूर में हुई हताहतों की संख्या को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान का मुद्दा उठा सकता है। कांग्रेस ने इस मामले में रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दिया है।

हाल के दिनों में कई विपक्षी दलों में टूट-फूट देखने को मिली है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों ने कथित तौर पर नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में विलय का दावा किया है और लोकसभा में अलग बैठने की मांग की है। वहीं, टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसद इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

इसके अलावा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह लोकसभा सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसद पहले ही भाजपा का दामन थाम चुके हैं। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने पहले बताया था कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा और आवश्यक विधायी कार्य किए जाएंगे।

इस बीच, 130वें संविधान संशोधन विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) भी 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे सकती है। इस प्रस्तावित विधेयक में यह प्रावधान चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि किसी गंभीर अपराध के मामले में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी केंद्रीय/राज्य मंत्री को लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ता है, तो उनका पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। इसी प्रावधान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।