अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष में नाटो सहयोगी देशों, विशेषकर ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा सैन्य साथ न देने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने नाटो को 'कागजी शेर' बताते हुए सहयोगियों की आलोचना की और कहा कि जब अमेरिका को जरूरत है, तो बाकी देश मदद के लिए आगे नहीं आए। ट्रंप चाहते थे कि नाटो देश हॉर्मोज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने के लिए अपने युद्धपोत भेजें, लेकिन कई देशों ने इससे मना कर दिया।
ट्रंप ने सहयोगियों को "अनुचित" करार दिया और कहा कि उन्हें अब NATO की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका दूसरों की सुरक्षा पर अरबों खर्च करता है, लेकिन सहयोगियों ने ईरान युद्ध में समर्थन नहीं दिया। ट्रंप ने कहा कि सहयोगियों के रवैये को देखते हुए वह इस सैन्य गठबंधन से अमेरिका को बाहर निकालने या दूरी बनाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
ट्रंप ने ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य नाटो सहयोगियों पर निशाना साधा है क्योंकि उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध में सीधे शामिल होने से इनकार कर दिया था।ट्रंप ने कहा कि नाटो देश अमेरिका पर बहुत ज्यादा बोझ डालते हैं और जब अमेरिका को जरूरत होती है, तो वे साथ नहीं आते। उन्होंने इस गठबंधन में बने रहने पर भी सवाल उठाए हैं।
नाटो के अलावा, ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की भी आलोचना की है, जो संघर्ष में अमेरिकी सैन्य प्रयासों का समर्थन नहीं कर रहे थे। ट्रंप नाटो से अमेरिका को बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। यह स्थिति ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पैदा हुई है, जहां अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है, लेकिन उसके सहयोगी देश इस युद्ध को अनावश्यक मानकर इससे दूर रहना पसंद कर रहे हैं।