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PM मोदी की यात्रा के दौरान भारत और ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते पर करेंगे हस्ताक्षर, क्या हैं इसके मायने?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 24 जुलाई को लंदन पहुंचने पर भारत, ब्रिटेन के साथ लंबे समय से प्रतीक्षित एफटीए यानी मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेगा। मुक्त व्यापार समझौते को दोनों देशों के बीच तीन सालों तक रुक-रुक कर चली बातचीत के बाद अंतिम रूप दिया गया है। 

इस समझौते से ब्रिटेन की व्हिस्की, कारों और फूड आइटम पर टैरिफ में कटौती होगी। वहीं भारतीय कपड़ों और इलेक्ट्रिक वाहनों को ब्रिटिश बाजार में ड्यूटी फ्री पहुंच मिलेगी। ब्रिटेन ने इसे ब्रेक्सिट के बाद का अपना सबसे बड़ा व्यापार समझौता और भारत द्वारा अब तक का सबसे अच्छा समझौता बताया है।

भारत स्कॉच व्हिस्की पर ड्यूटी को तत्काल 150% से घटाकर 75% और अगले 10 सालों में 40% तक घटाएगा। वो कोटा के तहत ऑटोमोबाइल टैरिफ को घटाकर 10% करेगा और ब्रिटिश कंपनियों के लिए 38 बिलियन पाउंड के सरकारी टेंडर खोलेगा। बदले में, ब्रिटेन पहले दिन से ही 99% भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क हटा देगा। इनमें कपड़ा, चमड़ा, रत्न और इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं।

भारतीय आईटी विशेषज्ञों, योग प्रशिक्षकों और शेफ को अल्पकालिक वीजा मिलेगा। जबकि सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत भारतीय पेशेवरों के लिए तीन साल के लिए यूके नेशनल इंश्योरेंस माफ कर दिया गया है।

मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इसके कानूनी पहलुओं की जांच की जाएगी और ब्रिटेन की संसद से मंजूरी ली जाएगी। इसके एक साल में लागू होने की उम्मीद है। इस समझौते से ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद में 4.8 बिलियन पाउंड की बढ़ोतरी होने और भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों में एक लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

जहां एक ओर व्यवसायों को नई होड़ का सामना करना पड़ेगा वहीं उन्हें कम सप्लाई चेन, सस्ते इनपुट और सुचारू डेटा प्रवाह से भी फायदा होगा। मुक्त व्यापार समझौता रणनैतिक रूप से ब्रिटेन को ब्रेक्सिट के बाद के व्यापार को नया आकार देने में मदद करेगा। वहीं ये भारत को चीन-केंद्रित मूल्य श्रृंखलाओं से दूर जाने में भी मदद करेगा।